

स्थान : दिनेशपुर
ब्यरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के दिनेशपुर से आस्था और भक्ति की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो एक ओर लोगों को हैरान करती हैं तो दूसरी ओर सोचने पर मजबूर भी करती हैं। चड़क पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भक्ति का ऐसा रूप देखने को मिला, जिसमें दर्द और परंपरा का अनोखा संगम नजर आया।


चड़क पूजा के दौरान कुछ शिव भक्तों ने अपनी पीठ के आर-पार लोहे के नुकीले कांटे चुभवाए। इसके बाद वे खुद को ‘चड़क झूले’ से बांधकर हवा में ऊंचाई पर झूलते नजर आए। इस दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।


बताया जा रहा है कि इस बार आठ श्रद्धालुओं ने दो अलग-अलग पालियों में इस कठिन अनुष्ठान को पूरा किया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी पीड़ा के बावजूद इन भक्तों के चेहरे पर कोई दर्द या भय नहीं दिखाई दिया।


यह परंपरा भगवान शिव की कठिन साधना से जुड़ी मानी जाती है। श्रद्धालु पूरे चैत्र माह व्रत और उपवास रखते हैं और अंत में इस तरह की कठिन परीक्षा के जरिए अपनी भक्ति का प्रमाण देते हैं।

इन अनुष्ठानों में केवल कांटे चुभवाना ही नहीं, बल्कि नंगे पैर धारदार हथियारों पर चलना और ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर नृत्य करना भी शामिल होता है। इसे आस्था की चरम सीमा के रूप में देखा जाता है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि उनकी भक्ति सच्ची होती है, तो उन्हें इन कष्टों का अहसास नहीं होता और भगवान शिव उनकी रक्षा करते हैं। वहीं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पूजा में किसी प्रकार की कमी रह जाने पर ही अनहोनी की आशंका होती है।

हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह परंपरा बेहद जोखिम भरी और जानलेवा मानी जाती है। इसके बावजूद दिनेशपुर और आसपास के क्षेत्रों में सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी जारी है, जो आस्था और विश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाती है।

