
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की ओपनिंग जोड़ी ने टीम को लगातार कमजोर शुरुआत दी है। सुपर-8 में सेमीफाइनल की रेस में फंसी टीम इंडिया का पहले विकेट का औसत महज 6.8 है, जो टूर्नामेंट में शामिल 20 टीमों में सबसे कम है। यह आंकड़ा पाकिस्तान और जिम्बाब्वे जैसी कमजोर टीमों से भी नीचे है, और इसे देखकर साफ है कि भारतीय ओपनर्स टिक नहीं पा रहे और टीम को ठोस शुरुआत नहीं दे पा रहे।


पावरप्ले में भारत की शुरुआत रही:

- 8/8 vs USA
- 1/6 vs पाकिस्तान
- 0/3 vs नीदरलैंड्स
- 0/4 vs साउथ अफ्रीका

पांच मैचों में चार बार ओपनिंग जोड़ी दहाई तक भी नहीं पहुंची, और दो बार तो खाता भी खुला नहीं। अभिषेक शर्मा लगातार तीन डक बना चुके हैं, जबकि ईशान किशन भी एक बार शून्य पर आउट हुए। समस्या केवल कम रन की नहीं, बल्कि आउट होने का तरीका है – या तो रक्षात्मक जाल में फंसना या अनावश्यक शॉट खेलकर विकेट देना।


टी20 क्रिकेट में आज 200+ स्कोर सामान्य हैं, खासकर फ्लैट ट्रैक्स पर। लेकिन जब शुरुआत केवल 6-7 रन पर होती है, तो टीम को 160-170 रन तक पहुंचना भी संघर्षपूर्ण बन जाता है। खराब शुरुआत का मतलब है मिडिल ओवर्स में दबाव, जोखिम भरे शॉट और रनरेट की चिंता। भारत का पावरप्ले स्कोर दर्शाता है कि कभी टीम विकेट बचाने में फंसी तो कभी आक्रामकता दिखाने में ढही।


अब सवाल यही है कि टीम मैनेजमेंट क्या कदम उठाएगा:

- क्या ओपनिंग संयोजन बदले?
- क्या अप्रोच बदले?
- या मानसिकता में बदलाव?
सुपर-8 में हर मैच ‘करो या मरो’ जैसा है। अगर पहले विकेट का औसत 6.8 ही बना रहा, तो सेमीफाइनल का टिकट सिर्फ प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि दूसरे नतीजों और नेट रन रेट पर भी निर्भर करेगा।


