म्यूल अकाउंट्स पर एसटीएफ उत्तराखण्ड का बड़ा प्रहार, साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कसा शिकंजा

म्यूल अकाउंट्स पर एसटीएफ उत्तराखण्ड का बड़ा प्रहार, साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कसा शिकंजा

स्थान : देहरादून
ब्यरो रेपोर्ट

साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तराखण्ड ने म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए दो दिनों में चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं। इस कार्रवाई के तहत संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है। एसटीएफ के अनुसार पिछले एक माह के भीतर म्यूल अकाउंट्स से जुड़े कुल छह अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 10 नामजद अभियुक्तों सहित कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ विधिक कार्रवाई जारी है।

एसटीएफ द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ है कि आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जा रहे थे। कई मामलों में पहले से संचालित खातों की बैंकिंग सुविधाएं जैसे एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी भी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई जा रही थी। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और छिपाने के लिए किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों ने पाया कि बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों की धनराशि इन संदिग्ध खातों में ट्रांसफर की जा रही थी। डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे मामलों से ठगे गए करोड़ों रुपये इन खातों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित किए जा रहे थे। इस प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में ‘लेयरिंग’ कहा जाता है, जिसके जरिए वास्तविक अपराधियों तक धन पहुंचाया जाता है।

एसटीएफ और साइबर क्राइम टीम ने कई सप्ताह तक एनसीआरपी पोर्टल, समन्वय पोर्टल, सीएफसीएफआरएमएस, आई4सी इनपुट, बैंकिंग अभिलेखों, केवाईसी दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। साथ ही मनी ट्रेल एनालिसिस के जरिए खातों में आने-जाने वाले लेनदेन की बारीकी से जांच की गई। इसी तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर इस संगठित गिरोह के नेटवर्क का खुलासा संभव हो सका।

कार्रवाई के क्रम में आठ जून को साइबर क्राइम थाना देहरादून और कुमाऊं क्षेत्र में तीन नई एफआईआर दर्ज की गईं। इन मामलों में चार अभियुक्तों को नामजद किया गया है, जबकि उनके अन्य अज्ञात साथियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्रारंभिक जांच और स्थानीय सत्यापन में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी और 66डी के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां संदिग्ध बैंक खातों, उनसे जुड़े व्यक्तियों और संभावित बैंक कर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

एसएसपी एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य को उपलब्ध न कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि कमीशन, लालच या सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाते उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में खाताधारक को भी मुख्य अपराधी के समान कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। एसटीएफ ने लोगों से सतर्क रहने और साइबर अपराधियों के जाल में न फंसने की अपील की है।