लोहाघाट नगर में वेस्ट टायरों से नवाचार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

लोहाघाट नगर में वेस्ट टायरों से नवाचार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

स्थान – लोहाघाट
ब्यूरो रिपोर्ट

लोहाघाट नगरपालिका परिषद द्वारा पर्यावरण संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की गई है। जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशानुसार जनपद में सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अनुपयोगी वेस्ट टायरों को रचनात्मक तरीके से पुनः उपयोग में लाया गया है। इस नवाचारी प्रयास ने न केवल कचरा प्रबंधन को नई दिशा दी है, बल्कि नगर के सौंदर्य और सामाजिक वातावरण को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

नगरपालिका परिषद लोहाघाट ने बेकार पड़े पुराने टायरों और टिन के टुकड़ों को कचरा मानकर फेंकने के बजाय उन्हें उपयोगी और आकर्षक वस्तुओं में बदलने का कार्य किया है। इन अनुपयोगी टायरों से क्रिएटिव स्टूल, बच्चों के खेलने के लिए झूले और खिलौने, साथ ही रंग-बिरंगी कार्टून आकृतियां तैयार की गई हैं। ये संरचनाएं न केवल नगर की सुंदरता बढ़ा रही हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थलों को अधिक जीवंत, सुरक्षित और बाल–मित्र भी बना रही हैं।

पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा और अधिशासी अधिकारी सौरभ नेगी ने बताया कि इस पहल को पूरी योजना और सोच-समझ के साथ आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि अनुपयोगी टायर, जो सामान्यतः पर्यावरण प्रदूषण का बड़ा कारण बनते हैं, उन्हें पहले साफ किया गया, फिर रंगाई-पुताई कर कलात्मक रूप देकर उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया। इस कार्य में नगरपालिका कर्मचारियों के साथ-साथ रचनात्मक सोच रखने वाले स्थानीय युवाओं की भी सक्रिय सहभागिता रही, जिससे यह पहल सामुदायिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

नगरपालिका द्वारा तैयार की गई इन आकर्षक संरचनाओं को नगर के पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और बच्चों के खेलने के स्थानों पर स्थापित किया गया है। कार्टून आकृतियों और रंगीन डिजाइनों से सुसज्जित ये संरचनाएं बच्चों को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं। इससे बच्चे खेल–कूद की गतिविधियों में अधिक रुचि ले रहे हैं, वहीं अभिभावकों के बीच भी स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण को लेकर सकारात्मक संदेश जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह की पहल न केवल नगर को स्वच्छ और सुंदर बनाती है, बल्कि बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करती है। लोगों का मानना है कि यदि अन्य नगरपालिकाएं भी इसी तरह कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में काम करें, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने कहा कि यह पहल इस बात का सशक्त संदेश देती है कि यदि सोच सकारात्मक हो और संसाधनों का सही उपयोग किया जाए, तो कचरा भी समाज के लिए उपयोगी संपत्ति बन सकता है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इसी तरह के नवाचारों के माध्यम से नगर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण–अनुकूल बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

अधिशासी अधिकारी सौरभ नेगी ने नगरवासियों से अपील की कि वे जैविक और अजैविक कूड़े को अलग-अलग करके दें, ताकि कचरा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। नगरपालिका परिषद लोहाघाट की यह पहल आने वाले समय में न सिर्फ जनपद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है, जो स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है।