
स्थान – ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट
खुर्द नेपाली फार्म स्थित शिव-शक्ति कैलाश आश्रम में आयोजित पत्रकार वार्ता में हरिओम महाराज ने त्रयोदश ज्योतिर्लिंग प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 फरवरी 2026 को होने वाला यह आयोजन सनातन धर्म के सबसे बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में से एक होगा।


हरिओम महाराज ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात मणिकूट धाम पर दर्शन करने से श्रद्धालुओं को वही पुण्य फल प्राप्त होगा, जो देशभर में स्थित सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अलग-अलग दर्शन से मिलता है। यह उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर होगा, जो किसी कारणवश विभिन्न ज्योतिर्लिंगों के दर्शन नहीं कर पाते।


उन्होंने बताया कि मणिकूट धाम में एक ही स्थान पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन संभव होंगे, जिससे यह धाम आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होगा। इस आयोजन से सनातन संस्कृति और आस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

हरिओम महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे 13 से 15 फरवरी 2026 तक मणिकूट पर्वत, ऋषिकेश में आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करें।

उन्होंने जानकारी दी कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजाजी नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत स्थित मणिकूट पर्वत पर त्रयोदश ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इसमें तेरहवां ज्योतिर्लिंग ‘गुजरेश्वर महादेव’ के रूप में प्रतिष्ठित किया जाएगा।

हरिओम महाराज ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक होगा, जिसमें देशभर से संत, महात्मा और श्रद्धालु भाग लेंगे। आयोजन की तैयारियां भव्य स्तर पर की जा रही हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने विश्वास जताया कि त्रयोदश ज्योतिर्लिंग प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान मणिकूट धाम को सनातन धर्म के एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में नई पहचान दिलाएगा।

