

लोकेशन…… लक्सर
संवाददाता…… गोविन्द चौधरी

मुख्यमंत्री के हाल ही में लक्सर दौरे के बाद प्रशासन ने लक्सर और खानपुर क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हुए फसलों के नुकसान का आकलन तेज़ कर दिया है। बाढ़ के पानी से धान और गन्ने की फसलों को भारी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई के लिए शासन को जल्द रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी चल रही है।




प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस सर्वेक्षण कार्य में राजस्व विभाग के निरीक्षकों के साथ गन्ना विभाग के पर्यवेक्षक भी संयुक्त रूप से लगाए गए हैं। दोनों विभागों के अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर खेतों की स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं और नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।



जलभराव वाले इलाकों में नहीं हो रहा सर्वेक्षण

एसडीएम सौरव असवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन क्षेत्रों में अभी भी भारी जलभराव की स्थिति बनी हुई है, वहां फिलहाल सर्वेक्षण कार्य रोक दिया गया है। उन्होंने कहा, “ऐसे क्षेत्र जहां से बाढ़ का पानी उतर चुका है या जलस्तर कम हो गया है, वहां सर्वेक्षण का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रिपोर्ट पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार हो और वास्तविक स्थिति को उजागर करे।”


गन्ना और धान की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान
एसडीएम ने बताया कि गंगा और सोलानी नदी के किनारे बसे गाँवों की फसलें इस बाढ़ की सबसे बड़ी शिकार बनी हैं। खेतों में कई दिनों तक पानी भरे रहने के कारण गन्ना और धान की फसलें सड़ चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।


माह के अंत तक पूरी होगी रिपोर्टिंग प्रक्रिया
एसडीएम असवाल ने आगे बताया कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया इस माह के अंत तक पूरी कर ली जाएगी, और तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी, ताकि किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।


किसानों को राहत की उम्मीद
प्रशासन की इस सक्रियता से प्रभावित किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। बाढ़ से बेहाल किसान अब सरकारी मदद की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। शासन से उम्मीद की जा रही है कि रिपोर्ट के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि जल्द स्वीकृत की जाएगी, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके।



