

लोकेशन : बाजपुर /उधमसिंह नगर
रिपोर्ट : अकरम चौधरी


बाजपुर में खाद की दुकानों पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब किसानों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने दबिश दी और खाद की कालाबाजारी का काला सच उजागर हो गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम अमृता शर्मा के नेतृत्व में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी की, जिसमें भारी अनियमितताएं सामने आईं।



858 कट्टों में से सिर्फ 4 मिले मौजूद
प्रशासन की टीम सबसे पहले गोयल फर्टिलाइजर पहुंची। यहां ऑनलाइन स्टॉक में 858 कट्टे नीम कोटेड यूरिया दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 4 कट्टे ही पाए गए। इस बड़े अंतर ने पूरे कालाबाजारी नेटवर्क की पोल खोल दी।
एसडीएम अमृता शर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुकान को सील करने का आदेश दिया। इस खबर के फैलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और कई खाद विक्रेता दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए।



रामनिवास फर्टिलाइजर में सब कुछ ठीक
टीम जब दूसरी दुकान रामनिवास फर्टिलाइजर पहुंची, तो वहां स्टॉक और रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि हर विक्रेता कालाबाजारी में शामिल नहीं है, लेकिन कुछ दुकानदारों द्वारा की जा रही जमाखोरी पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर रही है।


प्रशासनिक कार्रवाई बनी उदाहरण
तहसीलदार अक्षय कुमार भट्ट और कृषि अधिकारी नरेंद्र सिंह मेहता भी इस कार्रवाई में मौजूद रहे। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई ने किसानों को कुछ राहत की उम्मीद दी है। हालांकि, सवाल अब भी बाकी हैं —
- जब सैकड़ों कट्टे खाद गायब थे, तो जिम्मेदार अधिकारी इतने दिनों तक चुप क्यों थे?
- क्या इस कार्रवाई के बाद वास्तव में खाद माफियाओं पर शिकंजा कसेगा, या यह महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी?

किसानों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने पहले ही सख्ती दिखाई होती, तो उन्हें खाद के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ता। अब किसान मांग कर रहे हैं कि सिर्फ सीलिंग नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।


