


देहरादून

सचिन कुमार

उत्तराखंड राज्य लंबे समय से पलायन की पीड़ा झेलता आ रहा है, लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर शुरू हुआ ‘गांव को गोद लो’ अभियान न केवल पहाड़ों को फिर से आबाद करने की ओर बढ़ रहा है, बल्कि विकास की किरण उन गांवों तक पहुंचा रहा है, जो दशकों से उपेक्षित थे।




मुख्यमंत्री धामी की पहल से जागा प्रवासियों का जुड़ाव
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर शुरू हुए इस अभियान में अब विदेशों में बसे उत्तराखंड के प्रवासी लोग भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्होंने अपने पैतृक गांवों को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है और कई ने तो अपने गांव चिन्हित भी कर लिए हैं। यह पहल सामुदायिक भागीदारी और गांव के विकास की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।



विधायक और सांसद भी आगे आए
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने जानकारी देते हुए कहा कि:
“यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि भारत के गांव आदर्श गांव बनें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहे हैं। उत्तराखंड में खुद मुख्यमंत्री, सभी सांसदों और विधायकों ने दो-दो गांवों को गोद लिया है।”


उन्होंने बताया कि जो गांव कभी विकास से कोसों दूर थे, आज वहां बिजली, सड़क, पानी, इंटरनेट और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। यह पहल न केवल पलायन को रोकने में सहायक है बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित कर रही है।


अभियान का उद्देश्य:
- पलायन को रोकना और युवाओं को गांवों में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना
- मूलभूत सुविधाओं का विकास कर गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना
- प्रवासी उत्तराखंडियों को गांवों से भावनात्मक रूप से जोड़ना
- सामुदायिक सहभागिता से स्थायी विकास सुनिश्चित करना

निष्कर्ष:
‘गांव को गोद लो‘ अभियान आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की एक जन-आंदोलन जैसी पहल बन चुका है। अगर इसी तरह प्रवासी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्य करते रहे, तो जल्द ही उत्तराखंड के गांव पलायन के बजाय लौटने की कहानियों के लिए जाने जाएंगे।



