


लोकेशन… बाजपुर
रिपोर्ट.. अकरम चौधरी

उत्तराखंड, जहां एक ओर पहाड़ों की खूबसूरती है, वहीं बरसात के मौसम में यही इलाके आपदा का कारण भी बन जाते हैं।



पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के चलते जहां नदियां उफान पर आ जाती हैं और भूस्खलन जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं, वहीं मैदानी इलाकों, विशेष रूप से नगरों में, जलभराव एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आता है।



जलभराव बनी सबसे बड़ी चुनौती
बाजपुर नगर की बात करें तो मानसून के शुरुआती दौर में ही नगर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। नदी-नालों में जमी गंदगी बारिश के समय ओवरफ्लो होकर सड़कों से होते हुए दुकानों और घरों में घुस जाती है, जिससे जनहानि के साथ-साथ मालहानि का खतरा भी बना रहता है।



प्रशासन की तैयारियां तेज
बाजपुर की उपजिलाधिकारी अमृता शर्मा ने बताया कि:
“मानसून सत्र शुरू होने से पहले नगर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया गया है। विशेष रूप से लेबड़ा नदी, जो हर साल बरसात में उफान पर आ जाती है, उसकी सफाई टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से शुरू कर दी गई है।”

इसके अलावा नालों की समयबद्ध सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि जलभराव की समस्या को न्यूनतम किया जा सके।


प्रशासन की अपील
प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने आस-पास की नालियों को अवरुद्ध न करें और कचरा इधर-उधर न फेंके। साथ ही आपात स्थिति में नगर प्रशासन या आपदा कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क करें।



