हल्द्वानी में गौला नदी के किनारे बसे लोगों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए नदी किनारे बसी सभी मलिन बस्तियों को एक सप्ताह के भीतर खाली करने का नोटिस जारी किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से नाराज़ स्थानीय निवासियों ने मंगलवार को एसडीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से नदी किनारे अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं, और अब अचानक प्रशासन ने उन्हें बेघर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक उन्हें वैकल्पिक आवास नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न की जाए।
प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय वार्ड पार्षद और वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन गरीबों को बिना पुनर्वास योजना के उजाड़ रहा है, जो कि अमानवीय और अनुचित है।
वहीं मामले में एसडीएम हल्द्वानी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि,
“गौला नदी हर मानसून में उफान पर रहती है और इस बार भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। जनहानि से बचने के लिए ही नदी किनारे बसे अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। सभी प्रभावितों को एक सप्ताह का समय दिया गया है ताकि वे सुरक्षित स्थान पर जा सकें।”
हालांकि प्रशासन ने इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किया कि विस्थापित लोगों को कहां बसाया जाएगा, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पुनर्वास के अतिक्रमण हटाया गया, तो वह वृहद आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।