गोल्डन फन वॉटर पार्क पर कार्रवाई के बाद फिर खुला संचालन, पट्टा निरस्तीकरण पर उठे सवाल

गोल्डन फन वॉटर पार्क पर कार्रवाई के बाद फिर खुला संचालन, पट्टा निरस्तीकरण पर उठे सवाल

रिपोर्टर : पंकज सक्सेना
स्थान : भुजियाघाट नैनीताल

डोलमाल भुजिया घाट स्थित गोल्डन फन वॉटर पार्क एक बार फिर चर्चा में है। हमारे द्वारा प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन ने वॉटर पार्क परिसर में किए गए अवैध निर्माण पर कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को बंद कराया था तथा परिसर को सील भी कर दिया गया था। हालांकि अब वॉटर पार्क के दोबारा संचालन शुरू होने से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार तहसील प्रशासन एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा पट्टा निरस्तीकरण की संस्तुति जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर वॉटर पार्क और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, वह भूमि मूल रूप से कृषि एवं पशुपालन कार्यों के लिए पट्टे पर आवंटित की गई थी। पट्टे की शर्तों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि भूमि का उपयोग केवल कृषि संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाएगा और उस पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण या व्यवसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जा सकती।

इसके बावजूद वर्षों से उक्त भूमि पर वॉटर पार्क, होटल तथा अन्य व्यावसायिक निर्माण संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह निर्माण कार्य चल रहा था तब संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।

सूत्रों का दावा है कि वॉटर पार्क स्वामी द्वारा उप जिलाधिकारी को एक शपथ पत्र भी दिया गया था, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि उनके द्वारा भूमि पर अवैध निर्माण कराया गया था। शपथ पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्हें भूमि के उपयोग संबंधी नियमों की पूरी जानकारी नहीं थी और उन्होंने अपने खर्च पर अवैध निर्माण को हटाने का आश्वासन दिया था। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करने की बात भी कही गई थी।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि भवन स्वामी स्वयं अवैध निर्माण की बात स्वीकार कर चुके हैं और राजस्व रिपोर्ट में भूमि के कृषि उपयोग का उल्लेख है, तो पट्टा निरस्तीकरण की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हुई। यदि पट्टा निरस्त होता है तो संबंधित भूमि का भविष्य में किस उद्देश्य से उपयोग किया जाएगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।

इसके अलावा भवन स्वामी द्वारा दिए गए शपथ पत्र में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि भविष्य में भूमि का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाएगा। क्या भूमि पर कृषि कार्य, पशुपालन, बकरी पालन या भेड़ पालन जैसी गतिविधियां की जाएंगी, अथवा कोई अन्य उपयोग प्रस्तावित है, इस संबंध में स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए और यदि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जिलाधिकारी स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं।