

स्थान – मंगलौर (हरिद्वार)
ब्यूरो रिपोर्ट

जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन दिनों बड़ी संख्या में आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से वर्ष 1985 का साक्ष्य मांगे जाने के कारण कई लोगों के आवेदन लंबित पड़े हैं। आवेदकों का कहना है कि उनके पास इतने पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।


लोगों का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र विद्यार्थियों, नौकरी के अभ्यर्थियों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वालों के लिए बेहद जरूरी दस्तावेज है, लेकिन प्रमाण पत्र जारी न होने से उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई आवेदकों ने बताया कि आवेदन करने के बाद भी केवल पुराने दस्तावेजों की कमी के कारण उनकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।


आवेदकों का कहना है कि वर्ष 1985 के साक्ष्य की मांग व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि अधिकांश परिवारों के पास इतने पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुराने दस्तावेजों के साथ अन्य वैकल्पिक प्रमाणों को भी मान्यता दी जाए, जिससे पात्र लोगों को राहत मिल सके।


लोगों ने कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और जनहित में बनाया जाना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इस प्रक्रिया के कारण समय और धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब आवेदकों की नजर प्रशासन के निर्णय पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या का जल्द समाधान निकालेगा और जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाकर हजारों परेशान आवेदकों को राहत देगा।


