
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

छात्रसंघ चुनाव को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में प्रत्याशी चयन के बाद सामने आई नाराजगी और गुटबाजी के बीच रविवार को संगठन के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा। परिषद ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष पद के लिए धीरज बिष्ट के नाम पर संगठन ने सभी स्तरों पर राय लेने के बाद निर्णय लिया है।

ABVP पदाधिकारियों ने कहा कि धीरज बिष्ट लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं और नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संगठन में उनके अनुभव और सक्रियता को देखते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए उन पर भरोसा जताया गया है।


पत्रकार वार्ता के दौरान परिषद पदाधिकारियों ने धीरज बिष्ट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि जिस तथाकथित ‘आईटीआई गैंग’ को लेकर चर्चाएं की जा रही हैं, उससे धीरज बिष्ट का किसी प्रकार का संबंध नहीं है।


परिषद नेताओं ने कहा कि चुनाव को लेकर संगठन पूरी तरह एकजुट है और धीरज बिष्ट के समर्थन में वर्तमान और पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी भी सक्रिय हैं। संगठन का दावा है कि करीब 10 से 12 वर्तमान और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारी चुनावी अभियान में उनका समर्थन कर रहे हैं।


धीरज बिष्ट के समर्थन में पूर्व और वर्तमान छात्र नेताओं में सूरज रमोला, रश्मि लांगुरिया और वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी सहित कई नाम सामने आ रहे हैं। संगठन का कहना है कि आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार को और तेज किया जाएगा।

हालांकि प्रत्याशी चयन के बाद ABVP के भीतर नाराजगी भी खुलकर सामने आई है। टिकट के दावेदार रहे कुछ छात्र नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी ने संगठन के सामने आंतरिक मतभेदों को दूर करने की चुनौती खड़ी कर दी है।



वहीं आर्यन बेलवाल के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की स्थिति में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। छात्र राजनीति से जुड़े लोगों की नजर इस बात पर भी है कि उनके मैदान में उतरने से चुनावी समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
ABVP पदाधिकारियों का कहना है कि नाराज साथियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। संगठन को उम्मीद है कि जल्द ही मतभेद दूर कर सभी कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाया जाएगा और वे धीरज बिष्ट के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे।
अब सभी की निगाहें 29 तारीख को होने वाले छात्रसंघ चुनाव और उसके परिणाम पर टिकी हैं। प्रत्याशियों के समर्थन में बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और तेज होने की संभावना है।

