

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्टर


पर्यटन नगरी मसूरी में पिछले लगभग 15 दिनों से पेयजल संकट गहराने के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मंगलवार को मसूरी व्यापार मंडल ने उत्तराखंड जल संस्थान कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया और शीघ्र समाधान की मांग उठाई।


व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन के चरम पर होने के बावजूद संबंधित विभाग समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं।



प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 144 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई यमुना-मसूरी पेयजल पंपिंग योजना के तहत वर्ष 2052 तक मसूरी में पानी की कमी नहीं होने का दावा किया गया था लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह दावा धरातल पर सफल होता दिखाई नहीं दे रहा है और शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत बनी हुई है।


व्यापार मंडल का कहना है कि इस योजना को मंजूरी दिलाने के लिए मसूरी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने करीब पांच वर्षों तक संघर्ष किया था इसके बावजूद योजना का अपेक्षित लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है लोगों का आरोप है कि विभागीय समन्वय की कमी के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है।
पर्यटन सीजन में पानी की कमी का असर होटल व्यवसाय पर भी पड़ रहा है होटल संचालकों को महंगे टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है व्यापारियों का कहना है कि इससे मसूरी की पर्यटन छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

मसूरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड जल संस्थान की कार्यप्रणाली से सरकार की छवि धूमिल हो रही है उन्होंने कहा कि जल संकट के चलते लोगों को टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे आम जनता और व्यवसायियों दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।


रजत अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड जल संस्थान और जल निगम के बीच समन्वय की कमी इस समस्या का प्रमुख कारण है उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो व्यापार मंडल आंदोलन को और तेज करने पर विचार करेगा वहीं स्थानीय लोगों ने भी सरकार और संबंधित विभागों से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।

