

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

खटीमा उपजिला चिकित्सालय से सात चिकित्सकों के अचानक हुए तबादलों को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने तबादलों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नुकसानदायक बताते हुए सरकार से तत्काल इन्हें निरस्त करने की मांग की है।


सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश गुप्ता ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर डॉक्टरों के तबादलों पर तत्काल रोक लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रभारी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंत के स्थानांतरण से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी।



उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मरीजों को अस्पताल में संतोषजनक उपचार मिल रहा था, लेकिन अब चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।


ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि खटीमा ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और नेपाल से उपचार के लिए आने वाले मरीज भी इन तबादलों से प्रभावित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तबादले वापस नहीं लिए तो उनका भूख हड़ताल अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा और क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

वहीं, राज्य आंदोलनकारी अली अहमद वारसी ने भी चिकित्सकों के तबादलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने और अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लोगों में लगातार नाराज़गी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाले ऐसे निर्णयों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।



फिलहाल पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जनभावनाओं को देखते हुए सरकार चिकित्सकों के तबादलों पर पुनर्विचार करेगी और खटीमा उपजिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

