

स्थान : रुद्रप्रयाग
ब्यूरो रिपोर्ट


ग्राम्य जीवन की स्मृतियों, लोक-परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय “गाँव-घर महोत्सव” का शुभारंभ आज पुस्तकालय विलेज, मणिगुह में हुआ इस महोत्सव का आयोजन हमारा गाँव-घर फाउंडेशन द्वारा किया गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण जीवन की समृद्ध परंपराओं और लोक-ज्ञान को पुनः स्थापित करना है।


कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने मुख्य अतिथि के रूप में किया इस अवसर पर उन्होंने अध्ययन कक्ष का उद्घाटन भी किया और पुस्तक यात्रा में सहभागिता करते हुए पुस्तक संस्कृति और ग्रामीण समाज के बीच संवाद को समय की आवश्यकता बताया।



अपने संबोधन में प्रो. लोहनी ने कहा कि गाँव केवल भौगोलिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपराओं, सामुदायिक जीवन और लोक-ज्ञान के जीवंत केंद्र हैं उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


महोत्सव का मुख्य उद्देश्य ग्राम्य जीवन की उन परंपराओं और मूल्यों को पुनः स्मरण करना है, जिनमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, सामूहिक श्रम, सामाजिक सहयोग और ज्ञान के प्रति सम्मान की भावना निहित है इसके माध्यम से गाँव को पुनः विचार, संवाद और रचनात्मकता के केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रथम दिन हिमालयी ज्ञान परंपरा पर संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें लोक-जीवन, पारंपरिक ज्ञान, लोक-चिकित्सा, कृषि एवं पर्यावरणीय विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई साथ ही कवि सम्मेलन, पारंपरिक ग्रामीण वस्तुओं एवं गढ़वाली व्यंजनों की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।

दूसरे दिन भी महोत्सव में विविध गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, ग्रामीण विषयों पर संवाद, ब्लॉगिंग के महत्व पर व्याख्यान, नाट्य कार्यशाला और ओपन-एयर चलचित्र प्रदर्शन शामिल हैं समापन समारोह में बच्चों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से पारंपरिक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा।


आयोजकों ने कहा कि यह महोत्सव गाँव, पुस्तकालय, युवाओं और लोक-संस्कृति के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास है, जो ग्रामीण ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उसे संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

