
ब्यूरो रिपोर्ट

हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी (Kalashtami) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव (Kaal Bhairav) को समर्पित है। भक्तों का मानना है कि इस दिन श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।



तिथि और शुभ मुहूर्त:
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की अष्टमी 11 मार्च 2026 की रात 01:54 बजे से शुरू होकर 12 मार्च 2026 की सुबह 04:19 बजे समाप्त होगी। धार्मिक जानकारों का कहना है कि काल भैरव की पूजा मुख्य रूप से निशा काल (रात के समय) की जाती है। इसलिए, इस बार 11 मार्च को ही व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है।


पूजा की सरल विधि:

- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
- रात में काल भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- उन्हें काले तिल, उड़द, नीले फूल, नारियल और इमरती का भोग अर्पित करें।
- पूजा के दौरान भैरव चालीसा का पाठ करें और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता है। इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

ज्योतिषीय महत्व:
काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और ‘समय का स्वामी’ कहा जाता है। जिनकी कुंडली में शनि या राहु-केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे हैं, उनके लिए यह व्रत रामबाण सिद्ध होता है। यह न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाता है बल्कि साधक को साहस और मानसिक शक्ति भी प्रदान करता है।

भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और संयम के साथ व्रत रखकर काल भैरव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकते हैं।


