सुबह 6:20 से सूतक काल, शाम 8 बजे होगी ग्रहणोपरांत आरती

सुबह 6:20 से सूतक काल, शाम 8 बजे होगी ग्रहणोपरांत आरती

स्थान : हरिद्वार

ब्यूरो रिपोर्ट

3 मार्च को आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस दौरान धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो गया। इसके चलते शहर के हर की पौड़ी सहित सभी मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।

ग्रहण शयनकाल सुबह 6:17 बजे से शुरू हुआ, जिसके कारण मंदिरों में सुबह से ही पूजा और दर्शनों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित रहा।

श्रद्धालुओं ने बताया कि चंद्र ग्रहण के कारण गंगा घाट पर सुबह से ही कम भीड़ रही। हर की पौड़ी सहित प्रमुख घाट खाली दिखाई दिए।

मंदिरों के कर्मचारियों ने बताया कि ग्रहण का प्रभाव लगभग 7:45 बजे तक रहेगा। इसके बाद मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे और भगवान की पूजा-अर्चना शुरू होगी।

ग्रहण समाप्त होने के बाद भगवान को गंगाजल से स्नान करवाया जाएगा और चंदन पूजा संपन्न की जाएगी।

धार्मिक अधिकारियों के अनुसार शाम 8 बजे गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। तभी मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सूतक काल और ग्रहण अवधि में मंदिरों में प्रवेश न करें।

श्रद्धालुओं को सलाह दी गई कि वे ग्रहण के दौरान शांतिपूर्ण ढंग से घर पर पूजा करें और धार्मिक नियमों का पालन करें।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चंद्र ग्रहण का समय पवित्र माना जाता है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष रीति-रिवाजों का पालन अनिवार्य होता है।

हर की पौड़ी पर तटस्थ कर्मियों ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया। घाट पर किसी भी प्रकार की भीड़-भाड़ नहीं होने दी गई।

स्थानीय ब्राह्मणों ने कहा कि ग्रहण और सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखना पारंपरिक रीति-रिवाजों का हिस्सा है।

धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद श्रद्धालु ग्रहण के बाद मंदिरों में प्रवेश कर आरती और दर्शन कर सकेंगे।

हरिद्वार प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुनिश्चित किया है कि ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन पूरी तरह किया जाए।