

स्थान : अल्मोड़ा
रिपोर्टर : संजय जोशी


जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से हवालबाग में राज्य स्तरीय “खेत बचाओ अभियान” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।


कार्यक्रम में मोटे अनाजों जैसे मांडुआ, झंगोरा, चौलाई सहित पारंपरिक फसलों के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया। विशेषज्ञों और वक्ताओं ने कहा कि बदलते मौसम और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच पारंपरिक फसलें किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं।



मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अल्मोड़ा की धरती पर किसानों के बीच आकर उन्हें नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन बन चुका है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और उसकी शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी का संरक्षण और कृषि भूमि को रासायनिक प्रदूषण से बचाना की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य मिल सके।

उन्होंने किसानों से नियमित मिट्टी परीक्षण कराने, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने और वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर खेती करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुसार फसल चयन करना अब समय की मांग है।


कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि बागवानी, पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की आय वृद्धि के लिए बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है तथा योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्मोड़ा जनपद में तारबाड़ योजना के अंतर्गत लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में भी लगातार काम कर रही है तथा अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिया जा चुका है।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन राज्य सरकार की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया तथा कृषि संरक्षण, मिट्टी संवर्धन और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया।

