

स्थान : हरिद्वार
ब्यरो रेपोर्ट


गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किए जाने की मांग को लेकर योग गुरु स्वामी रामदेव और साध्वी ऋतंभरा ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय का विशेष महत्व रहा है तथा इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए।


स्वामी रामदेव ने कहा कि प्राचीन काल में भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार गौ आधारित जीवन पद्धति थी। उनका कहना था कि गाय भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है तथा इसके संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।



उन्होंने गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में जैविक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

स्वामी रामदेव ने कहा कि गौमूत्र और गोबर पर विभिन्न स्तरों पर अनुसंधान किए गए हैं तथा इनसे जुड़े उत्पादों और प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर निरंतर कार्य हो रहा है। उन्होंने सरकार से किसानों को सीधे प्रोत्साहन और सहायता देने की भी मांग की।
उन्होंने आवारा पशुओं और विशेष रूप से नंदी के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देशभर में पर्याप्त संख्या में नंदीशालाओं और गौशालाओं की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि पशुओं के संरक्षण की व्यवस्था बेहतर हो सके।

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और गौ संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए तथा इसके लिए शैक्षणिक स्तर पर भी प्रयास किए जा सकते हैं।


दोनों संतों ने केंद्र और राज्य सरकारों से गौ संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार को लेकर ठोस नीतियां बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

