
स्थान : हल्द्वानी

ब्यूरो रिपोर्ट

दमुवाढूँगा में सभी सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित सभा में उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने वाली यूजीसी गाइडलाइन 2026 के समर्थन में जोरदार विचार-विमर्श हुआ। सभा की अध्यक्षता जी आर टम्टा ने की, जबकि संचालन गंगा प्रसाद ने किया।


सभा में निर्णय लिया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी गाइडलाइन पर लगाई गई रोक हटाई जाए और 15 मार्च को एक विशाल रैली आयोजित कर सरकार को ज्ञापन सौंपा जाए। यह रैली 19 मार्च को होने वाली सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले आयोजित की जाएगी।


वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी ने 2012 के पुराने नियमों को मजबूत किया। नए नियम एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
सामाजिक प्रतिनिधियों ने बताया कि कुछ वर्गों ने गाइडलाइन लागू होने से पहले ही इसका विरोध शुरू कर दिया, जबकि यह नियम सभी छात्रों के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

नए नियमों की मुख्य बातें:

- हर संस्थान में इक्विटी कमेटी का गठन, जो भेदभाव की शिकायतों का निवारण करेगी।
- ईओसी (समान अवसर प्रकोष्ठ) वंचित वर्ग के छात्रों को मदद देगा।
- जातिगत भेदभाव की परिभाषा में ओबीसी को भी शामिल किया गया।
- शिकायतों का निवारण 24 घंटे में और जांच रिपोर्ट 15 दिन में प्रस्तुत करनी होगी।
सभा के उपरांत यूजीसी के समर्यन कार्यक्रम के लिए कमेटी का गठन किया गया। जी आर टम्टा को संरक्षक बनाया गया, जबकि शंकर लाल, सुंदरलाल बौद्ध, नफीस अहमद खान, आर आर आर्य, गंगा प्रसाद और अन्य प्रमुख सदस्य इसमें शामिल हैं।

मूल निवासी संघ, भीम आर्मी, लोकतांत्रिक मंच, डॉ. अंबेडकर मिशन, फाउंडेशन, डॉ. अंबेडकर जनकल्याण समिति और प्रगतिशील अधिवक्ता संघ समेत अन्य बहुजन संगठनों ने सभा में यूजीसी गाइडलाइन के समर्थन में विचार व्यक्त किए।
सभा के समापन पर तय किया गया कि आगामी समय में भव्य रैली और सभा आयोजित की जाएगी ताकि उच्च शिक्षा में समान अवसर और भेदभाव रहित वातावरण के लिए जन जागरूकता बढ़ाई जा सके।

इस आयोजन ने सामाजिक संगठनों और शिक्षा जगत के बीच आपसी समन्वय और संवाद को मजबूत करने का संदेश भी दिया।


