हरिद्वार में किन्नरों ने खेली मसान की होली, परंपरा और आस्था का अनोखा संगम

हरिद्वार में किन्नरों ने खेली मसान की होली, परंपरा और आस्था का अनोखा संगम

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

होली के रंगों के बीच धर्मनगरी हरिद्वार में इस बार एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। यहां किन्नर समुदाय ने मसान की होली खेलकर आस्था और परंपरा का अनूठा संदेश दिया।

धर्मनगरी हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर किन्नर समुदाय के लोग एकत्रित हुए। उन्होंने विधि-विधान के साथ चिता की भस्म की पूजा-अर्चना की और इसके बाद मसान की होली की शुरुआत की।

परंपरा के अनुसार किन्नरों ने चिता की भस्म को एक-दूसरे पर लगाकर होली खेली। इस दौरान भक्ति संगीत और ढोल की थाप पर किन्नर समुदाय के लोग श्मशान घाट परिसर में ही झूमते और थिरकते नजर आए।

मसान की होली को जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसे इस संदेश के रूप में देखा जाता है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंततः सब कुछ भस्म में ही विलीन हो जाता है।

बताया जाता है कि मसान की होली की प्राचीन परंपरा वाराणसी के मणिकर्णिका घाट से जुड़ी है। वहां सदियों से चिता की भस्म से होली खेलने की परंपरा चली आ रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा का संबंध भगवान शिव से जोड़ा जाता है। कथा के मुताबिक भगवान शिव ने अपने विवाह के अवसर पर भूत-प्रेतों और गणों के साथ मसान में होली खेली थी।

यही कारण है कि मसान की होली को शिवभक्तों के बीच विशेष महत्व प्राप्त है। इसे वैराग्य, मोक्ष और अध्यात्म से जुड़ी परंपरा माना जाता है।

हालांकि पहले यह परंपरा मुख्य रूप से वाराणसी तक सीमित थी, लेकिन अब अन्य धार्मिक नगरों में भी इसका चलन देखने को मिल रहा है। हरिद्वार में किन्नर समुदाय द्वारा इस परंपरा का निर्वहन उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

इस आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भीड़ भी घाट पर मौजूद रही। कई लोगों ने इस अनोखी होली को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।

किन्नर समुदाय के सदस्यों ने बताया कि मसान की होली उनके लिए आस्था और समर्पण का पर्व है। यह उन्हें जीवन के अस्थायी स्वरूप की याद दिलाता है और आध्यात्मिक चिंतन की प्रेरणा देता है।

होली के इस अनूठे रंग ने धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था, परंपरा और उत्सव का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।