स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रम दूर करने उतरा यूपीसीएल

स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रम दूर करने उतरा यूपीसीएल

स्थान : देहरादून

ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने प्रदेश में बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष पखवाड़ा अभियान शुरू किया है। निगम का कहना है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिल बढ़ने की आशंका निराधार है।

निगम के अधिशासी निदेशक संजय टम्टा ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद शुरुआती बिलों में जो बढ़ोतरी दिखाई दे रही है, वह वास्तविक खपत में वृद्धि नहीं बल्कि तकनीकी प्रक्रिया के कारण है।

उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन के बाद डेटा सत्यापन की बहु-स्तरीय प्रक्रिया अपनाई जाती है। पहले एजेंसी द्वारा मीटर स्थापित किया जाता है, फिर संबंधित डेटा का आधिकारिक सत्यापन होता है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण पहला बिल एक या दो माह की खपत को जोड़कर जारी हो सकता है।

इसी वजह से उपभोक्ताओं को बिल अधिक प्रतीत हो रहा है, जबकि न तो बिजली दरों में कोई बदलाव हुआ है और न ही मीटर की माप प्रणाली में। निगम के अनुसार पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक मीटर और स्मार्ट मीटर की मूल माप प्रणाली समान है।

अंतर केवल इतना है कि स्मार्ट मीटर में संचार मॉड्यूल जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की जानकारी रियल टाइम में प्राप्त कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता और नियंत्रण दोनों में सुधार होगा।

निगम ने बताया कि उपभोक्ता अब प्रति घंटे अपनी बिजली खपत देख सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि किस उपकरण से अधिक खपत हो रही है। यदि घर में कोई न हो और खपत दर्ज हो रही हो तो तुरंत जांच कर अनावश्यक उपकरण बंद किए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त भुगतान संबंधी जानकारी भी मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत उपलब्ध होगी। उपभोक्ता यह देख सकेंगे कि उन्होंने कितना भुगतान किया है और कितना बकाया है।

यूपीसीएल का कहना है कि यह पखवाड़ा अभियान उपभोक्ताओं को जागरूक करने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शंकाओं का समाधान करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, ताकि बिजली बिल को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके और बिलिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी बने।