
स्थान -उधम सिंह नगर

ब्यूरो रिपोट

क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के जंगलों में एक ऐसा ‘महाबली’ छिपा है, जिसकी एक झलक पाने के लिए दुनिया बेताब है? जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के ठीक बगल में, तराई के इस शांत इलाके में एशिया के विशालकाय टाइगरों में से एक अपनी सल्तनत चलाता है।

लेकिन आज इस जंगल में कुछ ऐसा हुआ है, जिसने पर्यटकों और स्थानीय लोगों की किस्मत बदल दी है। आखिर क्या है वो ‘नया दरवाजा’ जो खुला है, और क्यों इस जंगल को अब ‘फाँटो का स्वर्ग’ कहा जा रहा है? यह कहानी है डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य के उस विजन की, जिसने वीराने में जान फूंक दी।


तराई पश्चिमी वन प्रभाग का ‘फाँटो इको-टूरिज्म जोन’ आज अपनी अलग पहचान बना चुका है। इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा नाम है— डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि यह इलाका अब सैलानियों की पहली पसंद बन रहा है।

जंगल की प्रकृति को समझते हुए यहां पेड़ों के ऊपर आकर्षक ट्री-हाउस बनवाए गए, तो जंगल के बीचों-बीच ‘टी-हाउस’ जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गईं। विभाग द्वारा तैयार किए गए विशेष जलाशयों पर जब टाइगर पानी पीने आता है या हाथियों का झुंड अठखेलियां करता है, तो वह दृश्य किसी सपने जैसा लगता है।

आज का दिन ऐतिहासिक है। पतरामपुर रेंज से नए सफारी गेट का उद्घाटन हो गया है। सांसद अजय भट्ट और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जैसे ही फीता काटा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल गए।

फाँटो की इस रहस्यमयी धरती पर जब खुली जिप्सी कच्ची पगडंडियों पर आगे बढ़ती है, तो हर मोड़ पर रोमांच महसूस होता है। दोस्तों और परिवार के साथ यहां की सफारी किसी अनोखे अनुभव से कम नहीं—कभी हाथियों का झुंड रास्ता रोक लेता है, तो कभी मोर पंख फैलाकर स्वागत करता दिखाई देता है।
भले ही उस ‘महाबली’ टाइगर की झलक अब कम मिलती हो, लेकिन यहां टाइगरों का मजबूत कुनबा आज भी शान से जंगल पर राज करता है।

तराई के इन खामोश रास्तों पर अब रोमांच की नई कहानी लिखी जा चुकी है। यह नया गेट डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य के उस सपने का साकार रूप है, जिसने फाँटो की मिट्टी को नई पहचान दी।
अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून और रोमांच महसूस करना चाहते हैं, तो पतरामपुर का यह नया द्वार आपका इंतजार कर रहा है।

