नारायणबगड़ के भगोती गांव में ‘जन-जन की सरकार’ कार्यक्रम, समस्याओं पर भिड़े सत्ता और विपक्ष के नेता

नारायणबगड़ के भगोती गांव में ‘जन-जन की सरकार’ कार्यक्रम, समस्याओं पर भिड़े सत्ता और विपक्ष के नेता

स्थान : चमोली

ब्यूरो रिपोर्ट

शुक्रवार को नारायणबगड़ विकासखंड के भगोती गांव में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर सचिव मनुज गोयल ने की। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और ग्रामीणों की शिकायतों का निस्तारण करने के प्रयास किए गए।

कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी थराली पंकज भट्ट, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, ब्लॉक प्रमुख नारायणबगड़ गणेश चंदोला समेत कई विभागों के आला अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान निकाला जाएगा और लंबित प्रकरणों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, कार्यक्रम के दौरान दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने पूरे आयोजन का माहौल बदल दिया। जनता की समस्याओं पर चर्चा के बीच सत्ता और विपक्ष के नेता आपस में ही उलझते नजर आए। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई और उपजिलाधिकारी को बीच-बचाव करना पड़ा।

पहली घटना में कांग्रेस नेता संदीप पटवाल और विधायक भूपाल राम टम्टा के बीच सड़क निर्माण को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। बताया जा रहा है कि संबंधित सड़क के निर्माण और उसकी स्वीकृति को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। बहस इतनी बढ़ गई कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।

वहीं दूसरी तस्वीर में कांग्रेस नेता संदीप पटवाल और छेकुड़ा वार्ड के जिला पंचायत सदस्य सूरी कनेरी के बीच भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली। दोनों के बीच विकास कार्यों और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बहस हुई, जो कुछ देर तक चलती रही।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और जन समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों को शांत कराया और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर कार्यक्रम में पहुंचे थे, लेकिन नेताओं के बीच हुई बहस से माहौल कुछ समय के लिए असहज हो गया। हालांकि बाद में कार्यक्रम सामान्य रूप से जारी रहा और विभिन्न विभागों ने लोगों की शिकायतें सुनीं।

कुल मिलाकर “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम का उद्देश्य जनता तक प्रशासन को पहुंचाना था, लेकिन सामने आई इन दो तस्वीरों ने यह भी दिखाया कि जमीनी मुद्दों पर राजनीतिक खींचतान किस तरह सार्वजनिक मंच पर भी उभर आती है।