
स्थान : पौड़ी गढ़वाल
ब्यूरो रिपोर्ट
वन विभाग पौड़ी के तत्वावधान में लीसा विदोहन के माध्यम से रोजगार सृजन और वनाग्नि सुरक्षा को लेकर शहर के रामलीला मैदान में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक राजकुमार पोरी ने दीप प्रज्वलित कर किया।


कार्यक्रम में गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, अनिल बिष्ट सहित अन्य लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वन संरक्षण, लीसा विदोहन और वनाग्नि रोकथाम का संदेश प्रभावी रूप से आम जनता तक पहुंचाया गया।


कार्यक्रम के संयोजक गजेंद्र पाठक ने शीतला खेत मॉडल को प्रस्तुत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण, आजीविका संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार के साथ-साथ वनों की सुरक्षा में भी भागीदार बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी, डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव, डीएफओ सिविल एवं सोयम पवन नेगी तथा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केसर सिंह नेगी ने लीसा दोहन को वन संपदा संरक्षण के साथ ग्रामीण महिला समूहों के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बताया। वक्ताओं ने कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और वनाग्नि रोकथाम में जन सहभागिता भी बढ़ेगी।


वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद दनोशी ने वन विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए गंभीर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष और लगातार हो रहा पलायन इस योजना के सफल क्रियान्वयन में बड़ी बाधा है। दनोशी ने आरोप लगाया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक जैसे ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों के भय के कारण ग्रामीण अपने गांव छोड़ने को मजबूर हैं। ऐसे हालात में रिजर्व और सिविल वन क्षेत्रों में जाकर लीसा दोहन के लिए ग्रामीणों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित होगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। उन्होंने वन विभाग से मानव-वन्यजीव संघर्ष के न्यूनीकरण के लिए ठोस और प्रभावी रणनीति तैयार करने की मांग की।


सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि जब तक ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तब तक न तो पलायन रुकेगा और न ही लीसा दोहन के माध्यम से रोजगार सृजन और वनाग्नि रोकथाम की योजनाएं धरातल पर उतर पाएंगी।

