
स्थान : दिनेशपुर
ब्यूरो रिपोर्ट
दिनेशपुर के आनंद खेड़ा नंबर-2 गांव की यह तस्वीर किसी फव्वारे या झरने की नहीं, बल्कि जल जीवन मिशन और जल संरक्षण के दावों की पोल खोलती है। 66 विधानसभा रुद्रपुर के इस गांव में लाखों रुपये की लागत से पानी की टंकी तो बना दी गई, लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद न तो टंकी को विधिवत चालू किया गया और न ही घर-घर पानी की आपूर्ति शुरू हो सकी।


हैरानी की बात यह है कि टंकी चालू हुए बिना ही प्रतिदिन लाखों लीटर साफ पेयजल बेवजह बहकर बर्बाद हो रहा है। गांव में बनी यह पानी की टंकी आज शोपीस बनकर रह गई है। एक ओर मई-जून की भीषण गर्मी में ग्रामीण एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय लापरवाही के चलते शुद्ध पानी खेतों में बह रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि टंकी से निकलने वाला पानी आसपास के खेतों में घुस रहा है, जिससे गेहूं, सरसों और मटर जैसी फसलें खराब हो रही हैं। इसके अलावा टंकी के आसपास बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो छोटे बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।


ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन समस्या आज तक जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने जरूर आते हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं देता।

इस पूरे मामले में जब संवाददाता गौतम सरकार ने उपजिलाधिकारी से बात की, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और संबंधित विभागीय अधिकारियों को जल्द सुधार के निर्देश दिए जाएंगे। हालांकि “जल्द” का कोई निश्चित समय नहीं बताया गया।

आनंद खेड़ा नंबर-2 गांव की यह स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ सरकार हर घर जल और जल संरक्षण की बात कर रही है, तो दूसरी ओर लाखों लीटर पीने का पानी यूं ही बर्बाद हो रहा है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस समस्या का स्थायी समाधान करता है या फिर यह पानी की टंकी यूं ही भ्रष्टाचार और लापरवाही की मूक गवाह बनी रहेगी।

