उत्तराखंड में प्री-SIR: 77% मतदाता मैपिंग पूरी, 19 लाख से अधिक से संपर्क नहीं, बढ़ी चिंता

उत्तराखंड में प्री-SIR: 77% मतदाता मैपिंग पूरी, 19 लाख से अधिक से संपर्क नहीं, बढ़ी चिंता

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग की ओर से चल रही प्री-SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत प्रदेशभर में मतदाताओं की बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के माध्यम से मैपिंग की जा रही है। निर्वाचन आयोग के अनुसार अब तक लगभग 77.5 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, जबकि शेष को जल्द कवर करने के लिए अभियान जारी है।

हालांकि, जारी आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। प्री-SIR के दौरान 19 लाख 79 हजार 164 मतदाता ऐसे हैं, जिनसे अब तक संपर्क नहीं हो सका है। प्रदेश में कुल 84 लाख 42 हजार 263 मतदाताओं की मैपिंग की जानी है। इस प्रक्रिया में 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जा रहा है और आगे की चरणबद्ध कार्रवाई में, जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं होगा, उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे जाएंगे।

प्री-SIR के शुरुआती चरण में ही बड़ी संख्या में मतदाताओं से संपर्क न हो पाना राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। भाजपा प्रवक्ता कमलेश रमन ने लोगों से जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाताओं का पारदर्शी सत्यापन है, इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग लगातार बीएलओ के माध्यम से संपर्क कर रहा है और मतदाताओं को भी अपने बीएलओ से संपर्क में रहना चाहिए, ताकि वे सूची में शामिल रह सकें।

वहीं कांग्रेस ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए इसे साजिश करार दिया है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे सजग रहें और बीएलओ—चाहे प्रशासनिक हों या पार्टी स्तर के—से लगातार संपर्क बनाए रखें।

उधर, भ्रम दूर करते हुए अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया कि प्री-SIR की प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने बताया कि अब तक 77.5 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है और शेष मतदाताओं तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

यदि कोई मतदाता छूट गया है, तो वह दोबारा अपने बीएलओ से संपर्क कर सकता है। इसके लिए घर-घर संपर्क के अलावा “बुक अ कॉल विद योर बीएलओ” जैसे ऑनलाइन विकल्प भी उपलब्ध हैं। साथ ही बूथ अवेयरनेस ग्रुप, बूथ लेवल एजेंट, सामाजिक प्रतिनिधि, अन्य विभागों के कर्मचारी और निर्वाचित प्रधानों के माध्यम से भी जानकारी साझा की जा सकती है।

प्री-SIR के अगले चरणों को लेकर प्रशासन सतर्क है, लेकिन बड़ी संख्या में शेष मतदाताओं की मैपिंग समय पर पूरी करना फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।