
स्थान : लालकुआँ
ब्यूरो रिपोर्ट

लालकुआँ स्थित सेंचुरी पेपर मिल से निकलने वाला दूषित नाला अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। इस नाले में मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि विशालकाय मगरमच्छ नाले से निकलकर लोगों के घरों की दहलीज तक पहुँचने लगे हैं, जिससे जान-माल का खतरा मंडरा रहा है।


यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बिंदुखत्ता क्षेत्र के घोडनाला, राजीवनगर, पटेल नगर, मुल्तानगर, बाजपुर चौराहा, सुभाष नगर, पश्चिम राजीवनगर, शास्त्री नगर, सत्रह एकड़, गांधीनगर, हल्दूधार, जवाहर नगर, शान्तिपूरी से लेकर किच्छा तक—जहाँ-जहाँ यह नाला गुजरता है—वहाँ लोगों की नींद उड़ चुकी है।


इसी सिलसिले में शहर के पत्रकारों की एक टीम ने जब प्रभावित इलाकों का दौरा किया, तो हालात बेहद गंभीर पाए गए। ग्रामीणों ने बताया कि नाले में दर्जनों छोटे-बड़े मगरमच्छ मौजूद हैं, जो अक्सर धूप सेंकने के लिए नाले से बाहर निकलकर खेतों और सड़कों पर आ जाते हैं।


बरसात के दिनों में जब सड़कों पर पानी भर जाता है, तब मगरमच्छों के डर से लोग बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं। वहीं रात के समय भय के कारण ग्रामीण घरों से बाहर निकलने से बचते हैं।
स्थानीय लोगों ने एक खौफनाक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक मगरमच्छ ने एक महिला पर हमले की नीयत से पीछा किया। गनीमत रही कि महिला ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचा ली। हालांकि वन विभाग द्वारा पूर्व में कुछ मगरमच्छों का रेस्क्यू किया गया है, लेकिन नाले में अनुकूल वातावरण और लगातार हो रहे प्रजनन के चलते इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि बच्चों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर वे बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सेंचुरी पेपर मिल का यह खुला और दूषित नाला उनके जीवन को नरक बना चुका है।

लोगों ने प्रशासन और मिल प्रबंधन से पुरजोर मांग की है कि इस नाले को तत्काल भूमिगत (अंडरग्राउंड) किया जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

