
स्थान – देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तराखंड में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में हाल के आपराधिक मामलों, पुलिस की कार्यप्रणाली और लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई। डीजीपी ने साफ शब्दों में कहा कि गंभीर आपराधिक घटनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


डीजीपी ने निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इसमें कोताही करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

लैंड फ्रॉड के मामलों को लेकर डीजीपी ने विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समयबद्ध और पूरी तरह पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में अब प्रारंभिक जांच अनिवार्य रूप से संबंधित क्षेत्र के सीओ द्वारा ही की जाएगी।


डीजीपी दीपम सेठ ने यह भी कहा कि सिविल प्रकृति के मामलों में अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि पुलिस की निष्पक्ष छवि बनी रहे।

भ्रष्टाचार को लेकर डीजीपी ने जीरो टोलरेंस नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सतर्कता विभाग को पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करनी होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।


डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखें और आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पुलिस की विश्वसनीयता और जनता का भरोसा बनाए रखना सर्वोपरि है।


इस हाई-लेवल समीक्षा बैठक को पुलिस महकमे में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे साफ है कि उत्तराखंड पुलिस में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

