पिथौरागढ़ बन रहा कीवी खेती का नया हब, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

पिथौरागढ़ बन रहा कीवी खेती का नया हब, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

स्थान – देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

सीमांत जिला पिथौरागढ़ तेजी से कीवी की खेती के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार की कीवी नीति के तहत जिले को कीवी क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ पर्वतीय क्षेत्रों के काश्तकारों को मिल रहा है। वर्तमान में जिले में 1560 नाली से अधिक भूमि पर कीवी की व्यावसायिक खेती की जा रही है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

जिले के मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि पिथौरागढ़ की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां कीवी उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्यान विभाग द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि कीवी की खेती को एक स्थायी और लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि कीवी की खेती पर्वतीय काश्तकारों के लिए कई मायनों में लाभकारी सिद्ध हो रही है। इस फसल को जंगली जानवरों से नुकसान नहीं होता, यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और बाजार में इसकी मांग एवं कीमत दोनों अच्छी होने के कारण किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। यही कारण है कि जिले के कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अब कीवी की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

उद्यान विभाग के अनुसार, कीवी क्लस्टर के विकास से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही पिथौरागढ़ जिले को प्रदेश में कीवी उत्पादन के एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कुल मिलाकर, पिथौरागढ़ में कीवी की खेती पर्वतीय कृषि को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनती जा रही है।