
स्थान – ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट
वन भूमि पर बसे 12 वार्डों के लोगों के समर्थन में नगर निगम खुलकर सामने आ गया है। नगर निगम बोर्ड बैठक में इन क्षेत्रों को डिफॉरेस्ट करने की मांग से संबंधित प्रस्ताव पास किया गया है। यह प्रस्ताव जल्द ही एक कमेटी के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसके साथ ही नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी के लिए पार्टी बनने की भी तैयारी कर ली है।


नगर आयुक्त ने बोर्ड बैठक समाप्त होने के बाद जानकारी देते हुए बताया कि 4 जनवरी को मेयर शंभू पासवान की अध्यक्षता में कई पार्षदों की एक टीम सुप्रीम कोर्ट जाएगी। यह टीम मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं को समझने के लिए एक तेज तर्रार अधिवक्ता से मुलाकात कर आवश्यक कानूनी जानकारी हासिल करेगी।


उन्होंने बताया कि बोर्ड बैठक में वन भूमि पर काबिज लोगों की समस्याओं को लेकर गहन चर्चा हुई। चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के हितों की रक्षा के लिए नगर निगम हर संभव कदम उठाएगा। नगर निगम का दावा है कि इन वार्डों में नियमों के तहत हाउस टैक्स लागू करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।


बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर लगाई गई रोक के कारण बाधित हो रही जन सुविधाओं को फिर से शुरू करने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया। नगर निगम का मानना है कि लंबे समय से निर्माण कार्य ठप होने के कारण आम जनता को बुनियादी सुविधाओं में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में केंद्र सरकार और न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज और तथ्य जुटाए जाएंगे, ताकि वन भूमि पर बसे लोगों को राहत मिल सके।


