हरिद्वार में संरक्षित पेड़ों की अवैध कटाई तेज, विभागीय लापरवाही उजागर, हरियाली पर मंडराया खतरा

हरिद्वार में संरक्षित पेड़ों की अवैध कटाई तेज, विभागीय लापरवाही उजागर, हरियाली पर मंडराया खतरा

लोकेशन- हरिद्वार

संवाददाता – धर्मराज

जिले में संरक्षित और महत्वपूर्ण प्रजातियों के पेड़ों की अवैध कटाई ने वन और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमजोर मॉनिटरिंग, सुस्त कार्रवाई और समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण हरिद्वार की हरियाली पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। बीते महीनों में कई क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की घटनाएँ सामने आई हैं।

रानीपुर: 9 आम के पेड़ कटे, तीन लोगों पर मुकदमा

अगस्त 2025 में रानीपुर क्षेत्र में 9 आम के पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया। विभाग ने मामले में तीन लोगों पर केस दर्ज किया है।

औरंगाबाद: 30 सागौन और कब्रिस्तान परिसर से 15 पेड़ गायब

औरंगाबाद में निजी भूमि पर 30 सागौन के पेड़ बिना अनुमति काटे गए, जबकि कब्रिस्तान परिसर से 15 पेड़ों की कटाई की गई। दोनों मामलों में दो ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

भगवानपुर–मंगलौर–कलियर: सैकड़ों पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी

भगवानपुर के खेलपुर, मंगलौर के मखदुमपुर और कलियर क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ काट दिए गए। विभागीय टीमें देर से मौके पर पहुंची, जिसके कारण कटान रोका नहीं जा सका।
राजाजी टाइगर रिज़र्व की बेरीबाड़ा रेंज में भी सागौन की अवैध लकड़ी के साथ एक आरोपी पकड़ा गया है, जबकि दो फरार बताए जा रहे हैं।

विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रही घटनाएँ साफ दिखाती हैं कि विभाग शुरुआती स्तर पर एक्टिव नहीं है। पर्यावरणविद कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि निगरानी तंत्र कमजोर है और प्रभावी कार्रवाई समय पर नहीं की जा रही।
उत्तराखंड में पिछले 20 वर्षों में करीब 50 हजार हेक्टेयर जंगल खत्म हो चुके हैं, जिसके कारण जलवायु संकट, जैव-विविधता में गिरावट और पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: तुरंत कड़े कदम जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे तो हरिद्वार पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ जाएगा।
इसके लिए विभाग को—

  • सभी मामलों की त्वरित जांच
  • दोषियों पर कठोर कार्रवाई
  • फील्ड टीमों की निगरानी बढ़ाने
  • अवैध कटान रोकने के लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने

जैसे कदम तुरंत उठाने होंगे।
अन्यथा आने वाले सालों में हरिद्वार अपनी हरियाली और पर्यावरणीय संतुलन दोनों खो सकता है।