श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें बलिदान दिवस पर उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रद्धा और ज्ञान का विशेष आयोजन

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें बलिदान दिवस पर उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रद्धा और ज्ञान का विशेष आयोजन

रिपोर्टर : शहजाद अली
स्थान : हरिद्वार

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें बलिदान दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार स्थित श्री गोविंद सिंह शोधपीठ में आज एक गरिमामय और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूरा परिसर गुरु साहिब की शिक्षाओं, त्याग और मानवता की रक्षा के संदेश से गुंजायमान रहा।

वैदिक मंगलाचरण और गुरुवाणी से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण और गुरुवाणी के मधुर स्वर से हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय के विद्वानों और शोधार्थियों ने गुरु तेग बहादुर साहिब के आध्यात्मिक विचारों, उनके त्याग और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए दिए गए ऐतिहासिक बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने किए गुरु साहिब को नमन

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि “गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान केवल सिख इतिहास का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का गौरव है। उनका जीवन त्याग, साहस और सत्य के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है। आज की युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ना हमारा नैतिक दायित्व है।”

शोधपत्र, शबद-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाई शोभा

शोधपीठ के विद्वानों ने गुरु साहिब के दार्शनिक योगदान, काव्य और सामाजिक दृष्टिकोण पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शबद-कीर्तन और मंचन ने पूरे वातावरण को भावपूर्ण और भक्तिमय बना दिया।

अतिथियों का सम्मान और कार्यक्रम का उद्देश्य

अंत में शोधपीठ की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुरु तेग बहादुर साहिब के सर्वोच्च बलिदान, सार्वभौमिक मानवाधिकारों और उनकी शिक्षाओं को समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुँचाना रहा।

यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि मानवता, सत्य और त्याग के प्रति समर्पण का संदेश भी।