विमेंस वर्ल्ड कप: भारत ने पाकिस्तान को 88 रन से हराकर टॉप पर किया कब्जा

विमेंस वर्ल्ड कप: भारत ने पाकिस्तान को 88 रन से हराकर टॉप पर किया कब्जा

भारत ने विमेंस वर्ल्ड कप में रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ 88 रन से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारतीय टीम दो मैचों से चार पॉइंट्स लेकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है।

पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम ने 50 ओवर में 247 रन बनाए और ऑलआउट हुई। हरलीन देओल ने 46 रन बनाए, जबकि अन्य बल्लेबाजों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। जवाब में पाकिस्तान की टीम 43 ओवर में 159 रन ही बना सकी। सिद्रा अमीन ने 81 रन बनाए। भारत की ओर से क्रांति गौड़ और दीप्ति शर्मा ने 3-3 विकेट लिए, जबकि स्नेह राणा को 2 विकेट मिले।

इस जीत के साथ भारत ने विमेंस वनडे में पाकिस्तान के खिलाफ लगातार 12वीं जीत दर्ज की। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला विमेंस वर्ल्ड कप में पांचवां था, जिसे भारत ने अपने नाम किया। साथ ही, भारत ने पुरुषों की टीम की तरह इस साल लगातार चौथे रविवार को पाकिस्तान को हराया है।

प्लेयर ऑफ द मैच: क्रांति गौड़
क्रांति गौड़ को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने 20 रन देकर पाकिस्तान की तीन महत्वपूर्ण विकेट लिए—सदफ शमास (6), आलिया रियाज (2) और नतालिया परवेज (33)।

टॉस में विवाद:
टॉस के दौरान रेफरी की गलती के कारण भारत टॉस हार गया। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सिक्का उछाला, पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने “टेल्स” बोला, सिक्का जमीन पर “हेड्स” गिरा। रेफरी ने गलती से सना की कॉल को सही मानते हुए पाकिस्तान को टॉस विजेता घोषित कर दिया।

दोनों टीमों की प्लेइंग XI:
भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), प्रतिका रावल, स्मृति मंधाना, हरलीन देओल, जेमिमा रॉड्रिग्ज, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, स्नेह राणा, रेणुका सिंह, क्रांति गौड़, श्री चरणी।
पाकिस्तान: फातिमा सना (कप्तान), मुनीबा अली, सिद्रा अमीन, आलिया रियाज, सिद्रा नवाज (विकेटकीपर), नतालिया परवेज, रमीन शमीम, नाशरा संधू, डायना बेग, सादिया इकबाल, सदफ शमास।

अन्य विवाद:
टॉस के बाद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया। इससे पहले मेंस एशिया कप में भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी पाकिस्तान के कप्तान से हाथ नहीं मिलाया था। इसके अलावा, भारतीय टीम ने PCB चीफ मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार किया और चैंपियन बनने के बावजूद बिना ट्रॉफी के लौटना पड़ा।