उत्तरकाशी का डुंडा तहसील भवन बना सवालों का केंद्र, मरम्मत पर खर्च हुए 48 लाख पर उठे सवाल

उत्तरकाशी का डुंडा तहसील भवन बना सवालों का केंद्र, मरम्मत पर खर्च हुए 48 लाख पर उठे सवाल

रिपोर्ट : दीपक नौटियाल
स्थान : उत्तरकाशी

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से नजदीकी तहसील डुंडा इन दिनों चर्चाओं में है। वजह है – तहसील भवन की जर्जर हालत। बरसात शुरू होते ही पूरा भवन टपकने लगा है और रिकॉर्ड रूम तक को तिरपाल से ढकना पड़ा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ ही महीने पहले इस तहसील भवन का “रिफिटिंग” कार्य पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया गया था। भूकंप रोधी बनाने के नाम पर 48 लाख 35 हजार रुपए की लागत से मरम्मत कराई गई थी। लेकिन भवन की दीवारें, छत, खिड़कियां और दरवाजे सबकी हालत यह साफ बता रही है कि काम में गुणवत्ता की भारी कमी रही।

मरम्मत के बाद डाला गया नया फर्श उखड़ चुका है, डेकोरेशन प्लाई में जगह-जगह छेद हैं, छत पर लगी लकड़ी की कड़ियां सड़ी हुई हैं। यहां तक कि रिकॉर्ड रूम, जहां तहसील क्षेत्र का सारा इतिहास और भू-अभिलेख सुरक्षित रखे जाते हैं, पानी टपकने से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया है।

कर्मचारी दबे स्वर में मान रहे हैं कि मरम्मत कार्य में घटिया गुणवत्ता और भ्रष्टाचार हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर किस इंजीनियर और अधिकारी ने इस भवन का एस्टीमेट तैयार किया और ठेकेदार को संतोषजनक कार्य पूर्ति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया?

तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी और एसडीएम जैसे कानून जानकार इसी भवन में बैठते हैं, बावजूद इसके भवन की दुर्दशा पर किसी की नजर नहीं गई या इसे जानबूझकर अनदेखा किया गया।

स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि करोड़ों की योजनाओं में इस तरह की अनियमितताएं गंभीर सवाल खड़े करती हैं। इस भवन की मरम्मत कार्य की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि शिकायत आने पर जांच की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि भूकंपरोधी पायलट प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्य में 48 लाख रुपए आखिर कहां खर्च हुए?

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजरें जांच की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।