

लोकेशन- लक्ष्मण झूला,ऋषिकेश

संवाददाता – सागर रस्तोगी

नीलकंठ महादेव की कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही पुलिस ने कांवड़ियों के लिए रूट प्लान तैयार कर लिया है। योजना के अनुसार, कांवड़ियों को राम झूला पुल के रास्ते नीलकंठ भेजा जाएगा, जबकि वापसी में उन्हें जानकी सेतु से होकर ऋषिकेश की ओर लाया जाएगा।




हालांकि, राम झूला पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए पुलिस और पीडब्लूडी दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पीडब्लूडी ने पुल को अधिकतम 400 लोगों का भार वहन करने योग्य तो बताया है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से 300 से 350 कांवड़ियों की एक बार में आवाजाही की सलाह दी है।




पीडब्लूडी द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो निर्माणाधीन बजरंग सेतु को वैकल्पिक रूप से कांवड़ियों के आवागमन के लिए खोला जा सकता है।
इस संबंध में पीडब्लूडी नरेंद्र नगर के अधिशासी अभियंता विजय कुमार मोगा ने बताया कि वर्ष 2022 से निर्माणाधीन बजरंग सेतु अब अंतिम चरण में है, और सितंबर 2025 तक इसका निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।


बजरंग सेतु की विशेषताएं:
- लंबाई: 132 मीटर
- चौड़ाई: 5 मीटर
- फुटपाथ: दोनों ओर डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़ा, 65 मिलीमीटर मोटाई के पारदर्शी कांच का फुटपाथ
- प्रवेश द्वार की आकृति: केदारनाथ धाम की शैली में
- आकर्षण: कांच के फुटपाथ वाला यह पुल विश्व के चुनिंदा सेतुओं में शामिल होगा



इस पुल के निर्माण से न केवल कांवड़ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि यह पुल देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।




