तुलसी का पौधा क्यों सूख जाता है? जानिए आम गलतियां और सही देखभाल के तरीके

तुलसी का पौधा क्यों सूख जाता है? जानिए आम गलतियां और सही देखभाल के तरीके

ब्यरो रिपोर्ट

तुलसी (Ocimum tenuiflorum) का पौधा धार्मिक और औषधीय दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि नर्सरी से लाया गया हरा-भरा तुलसी का पौधा कुछ ही दिनों में सूखने लगता है, जबकि उसकी नियमित देखभाल भी की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण देखभाल में होने वाली कुछ सामान्य गलतियां होती हैं, जिन्हें समय रहते ठीक किया जाए तो पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।

सबसे बड़ी गलती है जरूरत से ज्यादा पानी देना। कई लोग श्रद्धा के कारण रोजाना तुलसी में अधिक पानी डालते हैं, जिससे मिट्टी हमेशा गीली रहती है। इससे जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे सड़ने लगती हैं। ऐसे में पौधा धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है।

अगर तुलसी की पत्तियां पीली होकर गिरने लगें और मिट्टी से हल्की दुर्गंध आए, तो यह संकेत है कि पौधे को अधिक पानी दिया जा रहा है। सही तरीका यह है कि मिट्टी की ऊपरी परत को जांचें और जब वह 1-2 इंच तक सूखी हो तभी पानी दें।

दूसरी बड़ी गलती है गमले में ड्रेनेज की कमी। यदि गमले के नीचे पानी निकलने की व्यवस्था नहीं होगी, तो अतिरिक्त पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए हमेशा ऐसे गमले का उपयोग करें जिसमें नीचे छेद (drainage holes) हों।

एक और आम गलती है पौधे पर आने वाली मंजरी (बीज वाली बालियां) को न हटाना। जब तुलसी की मंजरी बनती है, तो पौधा अपनी ऊर्जा बीज बनाने में लगा देता है, जिससे उसकी वृद्धि धीमी हो जाती है और वह कमजोर होने लगता है।

इसे रोकने के लिए जैसे ही मंजरी दिखाई दे, उसे कैंची से काट देना चाहिए। इस प्रक्रिया को पिंचिंग कहा जाता है, जिससे पौधा अधिक घना और स्वस्थ रहता है।

हटाई गई मंजरी को सुखाकर नए पौधे उगाने या औषधीय उपयोग में भी लिया जा सकता है, जैसे तुलसी की चाय में।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही पानी, उचित धूप और समय-समय पर पिंचिंग से तुलसी का पौधा लंबे समय तक हरा-भरा और स्वस्थ रह सकता है।