जनता को राहत: पेयजल संकट पर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी की मॉनिटरिंग के बाद 3349 में से 2100 शिकायतें निस्तारित

जनता को राहत: पेयजल संकट पर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी की मॉनिटरिंग के बाद 3349 में से 2100 शिकायतें निस्तारित

देहरादून

सचिन कुमार

उत्तराखंड में गर्मी के बीच कई इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, लेकिन प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए लगातार सक्रिय है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कंट्रोल रूम को प्राप्त पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की और संबंधित नोडल विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

डीएम ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नोडल विभागों की जिम्मेदारी है, और कहीं भी दूषित पानी की शिकायत मिलती है, तो उस पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, वहां तत्काल मरम्मत की जाए, और पानी की गुणवत्ता की विधिवत जांच सुनिश्चित की जाए।

आंकड़ों पर एक नजर:

  • 14 अप्रैल से अब तक:
    • जिले में कंट्रोल रूम को मिली शिकायतें: 167
    • निस्तारित शिकायतें: 162
  • राज्यभर में जल संस्थान को मिली कुल शिकायतें (10 दिन में): 3349
    • निस्तारित शिकायतें: 2100
    • शेष लंबित शिकायतें: 1249

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि पूरे उत्तराखंड में 42 कंट्रोल रूम संचालित किए जा रहे हैं ताकि किसी भी क्षेत्र से आने वाली समस्या पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।

कहां करें शिकायत:

  • टोल फ्री नंबर: 0135-2726066, 1077
  • कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क: सभी जिलों में सक्रिय

डीएम बंसल के निर्देश:

  • सभी नोडल विभाग 24×7 अलर्ट मोड पर रहें
  • हर शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो
  • दूषित जल आपूर्ति पर कठोर कार्रवाई की जाए
  • पाइपलाइन सुधार व जल गुणवत्ता परीक्षण में कोई कोताही न हो