


देहरादून/रुद्रप्रयाग

एक ओर उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में हजारों पर्यटक सुकून की तलाश में पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर यह पर्वतीय राज्य अब ‘सड़क हादसों की भूमि’ बनता नजर आ रहा है। गुरुवार, 26 जून का दिन राज्य के लिए मौत की एक भयावह तारीख बन गया, जब चार अलग-अलग सड़क हादसों ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया।




रुद्रप्रयाग: सबसे भयावह हादसा
सुबह की शुरुआत ही दर्दनाक हादसे से हुई जब रुद्रप्रयाग में यात्रियों से भरी एक बस नदी में जा गिरी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 9 लोग अब भी लापता हैं। दर्जनों यात्री गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका उपचार चल रहा है। प्रशासन द्वारा सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।


चकराता और मसूरी में भी हादसे
बस हादसे की खबर के कुछ घंटों बाद ही, देहरादून के चकराता क्षेत्र में एक कार गहरी खाई में गिर गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
वहीं, मसूरी-देहरादून मार्ग पर गलोगीधार के पास दिल्ली के पर्यटकों की कार में आग लग गई। सौभाग्य से सभी यात्री समय रहते बाहर निकल गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।


जिला सहकारी बैंक मैनेजर की कार भी दुर्घटनाग्रस्त
इसी दिन रुद्रप्रयाग में ही जिला सहकारी बैंक के मैनेजर की कार 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे थम नहीं रहे, जिम्मेदारी कौन लेगा?

इन हादसों ने एक बार फिर प्रदेश के सड़क सुरक्षा इंतजामों और ट्रांसपोर्ट सिस्टम की पोल खोल दी है। पिछले कुछ महीनों में हुए कुछ प्रमुख हादसे:


- 23 जून: ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर बस का ब्रेक फेल, 30 यात्री थे सवार, बाल-बाल बचे।
- 23 मई: उत्तरकाशी में यात्रियों से भरी बस पलटी, ड्राइवर नशे में था।
- 18 अप्रैल: मसूरी में दिल्ली की टूरिस्ट बस पलटी, स्पीड और मेंटेनेंस वजह।
- 1 मई: कुमाऊं के गेबुआ में बस खेत में पलटी, ड्राइवर की लापरवाही बताई गई।
- 31 मार्च: हरिद्वार के कनखल में रोडवेज बस पलटी, 6 लोग घायल।


