पंचायत चुनाव पर न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की धामी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर चुनावी प्रक्रिया को उलझाया, जिससे हालात न्यायालय की रोक तक पहुंच गए।
अल्मोड़ा में मीडिया से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने कहा,
“सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, और 2016 के पंचायती चुनावों में बनाए गए चक्र को शून्य कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ
कि कई क्षेत्रों में लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार की नियत में खोट है।”
न्यायालय से की हस्तक्षेप की मांग
हरीश रावत ने न्यायालय से आग्रह करते हुए कहा कि वह सरकार को कड़ी फटकार लगाए और निर्देश दे कि एक सप्ताह के भीतर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को नई सिरे से शुरू किया जाए।
चुनाव में देरी पर जताई नाराज़गी
पूर्व मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि यह सरकार की विफलता है कि एक सामान्य प्रक्रिया को भी नियमानुसार नहीं चलाया जा सका। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव में जानबूझकर दखल और देरी की राजनीति कर रही है।