


स्थान:लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट

बेटे की नौकरी और अपनी पेंशन की मांग को लेकर लोहाघाट के गंगनोला निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग चेतराम एक बार फिर धरने पर बैठ गए हैं। सोमवार को उन्होंने लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के बाहर 115वीं बार धरना दिया। चेतराम का आरोप है कि वह 114 बार धरना दे चुके हैं, लेकिन हर बार शासन-प्रशासन ने उन्हें केवल आश्वासन देकर लौटा दिया।



चेतराम ने साफ कहा है, “अगर इस बार भी मेरी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं बिना किसी पूर्व सूचना के आत्मदाह करूंगा।” उन्होंने इस आत्मघाती कदम के लिए प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

5 साल संविदा पर काम किया, फिर निकाला गया बेटा

बुजुर्ग चेतराम ने बताया कि उनका बेटा लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में पांच वर्षों तक वार्ड बॉय के रूप में संविदा पर कार्यरत रहा, लेकिन बाद में उसे बिना कोई ठोस कारण बताए हटा दिया गया। इसके बाद से वह लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, पर कहीं से भी सुनवाई नहीं हो रही।


चेतराम का कहना है कि “मैं अपनी बूढ़ी पत्नी को साथ लेकर अधिकारियों के चक्कर काट चुका हूं। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं।”
1995 में हादसा, किडनी खराब, मुआवजा आज तक नहीं
चेतराम ने बताया कि 1995 में लोहाघाट महाविद्यालय के भवन निर्माण के दौरान वे छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय विभाग ने उन्हें स्थायी नौकरी और मुआवजा देने का वादा किया था, लेकिन वह वादा अब तक कागज़ों तक ही सीमित है।


दुर्घटना के चलते उनकी किडनी खराब हो गई, जिसके इलाज में उनके चार से पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अब वे भारी कर्ज में डूबे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बदहाल है।

हर बार थाने ले जाती है पुलिस, पर इस बार आर-पार की लड़ाई
चेतराम ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी क्षेत्र में कोई बड़ा जनप्रतिनिधि आता है, पुलिस उन्हें पूर्व सूचना के बिना धरने से उठाकर थाने ले जाती है, ताकि वे अपनी बात नहीं रख सकें। उन्होंने कहा कि इस बार वे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।


माली की ट्रेनिंग के बावजूद नौकरी नहीं
चेतराम ने बताया कि पूर्व में जिला उद्यान अधिकारी के कहने पर उन्होंने अपने बेटे को चौबटिया में माली की ट्रेनिंग दिलवाई थी, लेकिन उसे उद्यान विभाग में भी नियुक्ति नहीं मिली।
प्रशासन की चुप्पी, चेतराम की चेतावनी
इस पूरे मामले पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। वहीं चेतराम की आत्मदाह की चेतावनी ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।


