प्रेमनगर में फूटा गुस्सा: जल जीवन मिशन के अधूरे कार्य पर ग्रामीणों का प्रदर्शन तेज, 24 जून से धरने की चेतावनी

प्रेमनगर में फूटा गुस्सा: जल जीवन मिशन के अधूरे कार्य पर ग्रामीणों का प्रदर्शन तेज, 24 जून से धरने की चेतावनी

स्थान:लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट

हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत जल जीवन मिशन का कार्य पूर्ण कराने की मांग को लेकर पिछले डेढ़ माह से आंदोलनरत प्रेमनगर के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। जल संस्थान द्वारा योजना शुरू होने की झूठी खबर फैलाए जाने पर नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन कर 24 जून से एसडीएम कार्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी है।


झूठे दावे, अधूरा कार्य
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि जल संस्थान द्वारा मात्र एक दिन जेसीबी लगाकर खानापूर्ति की गई, और उसके बाद से कोई कार्य आगे नहीं बढ़ा। विभाग की इस कार्यप्रणाली को ग्रामीणों ने भ्रम फैलाने वाला प्रयास करार दिया है।


ग्रामीणों ने लगाए घोटाले के आरोप
गांव की आम बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि यदि 24 जून तक कार्य शुरू नहीं होता, तो सभी प्रेमनगरवासी एसडीएम कार्यालय लोहाघाट में सांकेतिक धरना प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने जल संस्थान पर झूठे आश्वासन देने और योजना निर्माण में घोटाले के आरोप भी लगाए हैं।


20 वर्षों से पानी की बाट जोह रहे हैं 300 परिवार
प्रेमनगर के लगभग 300 परिवार बीते दो दशकों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मई के अंतिम सप्ताह में एसडीएम लोहाघाट और जल संस्थान के अधिकारियों द्वारा यह वादा किया गया था कि जुलाई तक घर-घर जल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। लेकिन जून का दूसरा पखवाड़ा बीतने के बाद भी कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।


चौथा प्रदर्शन, चेतावनी के साथ आंदोलन की तैयारी
यह प्रेमनगर वासियों का पिछले डेढ़ महीने में चौथा प्रदर्शन है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अब भी प्रशासन और विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन के दूसरे चरण में वह अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।


प्रेमनगर वासियों का स्पष्ट संदेश:

“अब कोई झूठा आश्वासन नहीं चलेगा। अगर जल जीवन मिशन का कार्य गति से शुरू नहीं हुआ, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। आंदोलन की पूरी ज़िम्मेदारी प्रशासन और जल संस्थान की होगी।”


नजरें अब 24 जून पर
अब सबकी निगाहें 24 जून पर टिकी हैं, जब प्रेमनगर के ग्रामीण एसडीएम कार्यालय का घेराव कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार भी आश्वासन की चादर ओढ़ाएगा, या जमीनी कार्यवाही देखने को मिलेगी