

रिपोर्ट :संजय जोशी
स्थान : रानीखेत


अल्मोड़ा वन प्रभाग के अंतर्गत जौरासी रेंज के मानिला क्षेत्र में मंगलवार को कई नाप भूमि और वन पंचायत क्षेत्रों में वनाग्नि की सूचना से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार ग्राम एराड़ी राजवार नाप भूमि, बावड़ी सिमार नाप, डुंगरी नाप, सिमगांव नाप (जिसमें बाबलिया पत्थरखोला सम्मिलित है), पिपलीकोट नाप और चम्याली मल्ला नाप क्षेत्र आग की चपेट में आ गए।


वन विभाग के एसडीओ काकुल पुंडीर ने बताया कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) द्वारा फायर अलर्ट जारी किए जाने के बाद वन क्षेत्राधिकारी जौरासी के निर्देश पर दो टीमें घटनास्थल के लिए तुरंत रवाना की गईं। कुल 8 सदस्यीय टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।


नाप भूमि में फैली आग, आरक्षित वन क्षेत्र से बाहर की घटना
एसडीओ ने स्पष्ट किया कि यह आग आरक्षित वन क्षेत्र में नहीं, बल्कि नाप भूमि एवं वन पंचायत क्षेत्र में फैली। घटना की गंभीरता को देखते हुए संबंधित ग्राम राजस्व अधिकारियों को भी तत्काल सूचित किया गया।


तत्काल कार्रवाई से टली बड़ी आपदा
वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग के संभावित कारणों की जांच की और फायर लाइन बनाकर आग पर नियंत्रण पाया। बाटियों की सफाई कर आग को फैलने से रोका गया। विभाग की तत्परता से बड़ी वन संपदा को नुकसान से बचा लिया गया।
ग्रामीणों को किया गया जागरूक, दी सख्त चेतावनी
घटनास्थल पर जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को वनाग्नि की रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति आग लगाने में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग की अपील – सूचना दें, सहयोग करें
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी आग लगती है, तो तुरंत निकटतम वन कार्यालय को सूचित करें। एसडीओ काकुल पुंडीर ने कहा कि “आपकी सतर्कता और सहयोग से ही हम अपनी अमूल्य प्राकृतिक संपदा की रक्षा कर सकते हैं।”


इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि वन क्षेत्रों की सुरक्षा में सभी की भागीदारी आवश्यक है। समय पर की गई कार्रवाई ने जहां एक बड़ी आपदा को टाल दिया, वहीं यह भी संकेत देती है कि सतर्कता और जनसहभागिता से ही पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।


