श्रद्धा और भव्यता के बीच खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, मुख्यमंत्री धामी रहे साक्षी

श्रद्धा और भव्यता के बीच खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, मुख्यमंत्री धामी रहे साक्षी

रुद्रप्रयाग

विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज प्रातः विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए गए। इस शुभ अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धाम में उपस्थित रहे और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से प्रारंभ हुई, जिसमें पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चारण, हर हर महादेव के उद्घोष और सेना की ग्रेनेडियर रेजिमेंट के बैंड की भक्ति संगीत धुनों के बीच मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रातः 7 बजे मंदिर के मुख्य दक्षिण द्वार सहित गर्भगृह के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

इस वर्ष भी बाबा केदार का धाम अत्यंत भव्य रूप में सजाया गया, जिसे 108 क्विंटल से अधिक फूलों से अलंकृत किया गया। कपाट खुलते ही हेली द्वारा पुष्पवर्षा की गई, जिसने श्रद्धालुओं को अभिभूत कर दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “केदारनाथ धाम न केवल सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। यह उत्तराखंड के लिए उत्सव का अवसर है।” उन्होंने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, और इसके लिए राज्य सरकार ने सुरक्षा, सुविधा और संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं

मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान नियमों का पालन करने और संयम व श्रद्धा के साथ यात्रा करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा केदार के अनन्य भक्त हैं, और 2013 की आपदा के बाद उनके नेतृत्व में केदारपुरी के पुनर्निर्माण का कार्य भव्यता के साथ संपन्न हुआ।

कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर केदारनाथ मंदिर के रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी बागेश लिंग, विधायक आशा नौटियाल, जिलाधिकारी सौरभ गहरवार, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, वेदपाठीगण, धर्माचार्य और भैरवनाथ के पुजारी अरविंद शुक्ला समेत अनेक गणमान्य जन मौजूद रहे।

कपाट खुलने से पूर्व भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली ने श्री ओंकारेश्वर मंदिर (उखीमठ) से होते हुए गुप्तकाशी, फाटा, गौरीकुंड जैसे पड़ाव पार करते हुए धाम पहुंचकर धर्म परंपराओं के अनुरूप विशेष पूजा में भाग लिया।