

रिर्पोट: लक्ष्मण बिष्ट

स्थान: चंपावत

सुख, सम्रद्धि व हरियाली का प्रतीक हरेला पर्व चम्पावत जिले में हर्षोल्लास से मनाया गया । प्रतिवर्ष श्रावण संक्रांति को मनाये जाने वाला यह त्योहार उत्तराखण्ड के लोकपर्व के साथ साथ ऋतु व खेती किसानी का भी सूचक है । चम्पावत जिले में इस अवसर पर जगह जगह बृहद पौध व बृक्षारोपण कार्यक्रमों के साथ ही मेले खेलो का आयोजन किया गया


इससे पूर्व जिलेभर में सुबह से ही लोगो द्वारा घरों में बोए गए-हरेले को काट कर मंदिरों में पूजाअर्चना के साथ शिरोधारण कर मंगल जीवन की कामनाये की गयी । स्थानीय बताती है हरेला हमारा पारम्परिक त्यौहार है हरेले को सात दिन पूर्व विभिन्न अनाजो को मिट्टी वाले बर्तन में बोकर अंधेरे कमरे में रखा जाता है सात दिन बाद आज हरेले पर्व पर पूजा अर्चना के बाद काटकर सभी लोगों का शिरोधार्य किया जाता है तथा लम्बी आयु की कामना की जाती है


हरेला लोक पर्व के साथ साथ ऋतु व खेती किसानी का भी सूचक है । जानकारों का कहना है कि जिस वर्ष हरेला अच्छा उगेगा उस वर्ष फसल भी अच्छी होती है । इस सम्बंध में स्थानीय बताते है कि हरेला हमारी लोक संस्कृति के साथ ही प्रकृति से जुड़ा पर्व है यह पर्व ऋतु व खेती किसानी का भी सूचक है ।

वह बताते है कि जब वैज्ञानिक पद्धति नही थी तो लोग अपने बीज व फसल की गुणवत्ता को परखने के लिए इस त्यौहार से आंकलन करते थे । हरेला के अवसर पर बच्चों ने सवेरे घर-घर जाकर लोगों के सिर में हरेला रख लंबी आयु की कामना करी लोगों के द्वारा बच्चों को उपहार दिए गए तथा सभी घरों में आज उत्तराखंड के पारंपरिक पकवान पकाए गए


