सी.एम.एस के सामने गरजी आशा कार्यकर्ता

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रिपोर्टर – पंकज सक्सेना
स्थान – हल्द्वानी

महिला चिकित्सालय हल्द्वानी की समस्याओं के निराकरण और आशाओं पर अनर्गल आरोप लगाये, जाने के विरुद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन द्वारा महिला अस्पताल परिसर हल्द्वानी में धरना प्रदर्शन किया | प्रदर्शन के बाद महिला अस्पताल की सी.एम.एस से वार्ता की। उन्होंने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद सीएमओ नैनीताल को ज्ञापन भेजा गया | जिसकी प्रतिलिपि महानिदेशक स्वास्थ्य उत्तराखंड देहरादून को भेजी गई| धरने के माध्यम से चेतावनी दी गयी, कि आशाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया ,तो फिर से आंदोलन किया जायेगा |आशाओ ने कहा कि कोविड से लेकर स्वास्थ्य विभाग के तमाम सर्वे अभियान, गणना जैसे दर्जनों कामों में अपनी सेवाएं दे रही हैं | और उसके बावजूद भी आज तक आशायें न्यूनतम वेतन तक से वंचित हैं इसके बाद भी आशाओं ने पूरे समर्पण से अपनी सेवाएं दी हैं, और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आशाओं के कार्य को विशिष्ट तौर उल्लेखनीय मानते हुए सम्मानित किया है।

लेकिन महिला अस्पताल प्रशासन और जिले का स्वास्थ्य विभाग आशाओं के काम को काम नहीं समझता है, और आशाओं पर बेवजह के आरोप लगाये जा रहे हैं, जबकि महिला अस्पताल हल्द्वानी में हालात यह है, कि गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक अल्ट्रासाउंड टाइप टू और डाप्लर नहीं है, थोड़ा सा भी जटिल मामला सामने आने पर गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है, और अस्पताल की अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आशाओं पर डाली जा रही है | महिला अस्पताल हल्द्वानी में विभिन्न अव्यवस्थाओं के लिए आशाओं को दोषी ठहराया जा रहा जो बिल्कुल गलत है। मीडिया में लगाए गए | आरोपों से आशाओं की छवि धूमिल हो रही है, जिससे आशायें आहत हैं, और उनका मनोबल गिरा है।

जो कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उचित नहीं है |आशाओं ने कहा कि महिला अस्पताल हल्द्वानी में 24 घंटे गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच की सुविधा सुनिश्चित की जाए| अस्पताल में सेकंड लेवल अल्ट्रासाउंड, डाप्लर की सुविधा तत्काल शुरू की जाय इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की तारीखें तीन महीने बाद की नहीं बल्कि तत्काल उनका अल्ट्रासाउंड करने की सुविधा दी जाए साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे महिला अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति करने की मांग की है|

आशाओं ने कहा कि मांगों को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही नहीं हुई, तो मजबूरीवश आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा वही सीएमएस डॉ ऊषा जंगपांगी ने कहा कि सभी आशा वर्कर की कार्यशैली पर आरोप नहीं लगाए गए हैं। आशाओं ने हमेशा हेल्थ डिपार्टमेंट की मदद की है। लेकिन कुछ आशा वर्कर मरीजों को गुमराह कर निजी लैब और क्लिनिक में ले जाती हैं। इस मामले में आशाओं को ही दोषी आशाओं के खिलाफ कारवाई करने को कहा गया है।