

ब्यूरो रिपोर्ट


पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संकट और गहरा गया है। पार्टी के वरिष्ठ लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ने भी बागी खेमे का साथ देते हुए कथित ‘काकोली ग्रुप’ में शामिल होने का फैसला कर लिया है।


सूत्रों के अनुसार, प्रसून बनर्जी ने संसद में अलग संसदीय ब्लॉक बनाने की मांग से जुड़े पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उनके इस कदम को पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।


लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरे बागी गुट का नेतृत्व काकोली घोष दस्तिदार कर रही हैं। यह गुट खुद को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश में जुटा हुआ है और दावा कर रहा है कि उसे पार्टी के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बागी खेमे के साथ 19 से 20 लोकसभा सांसदों के होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह संख्या कायम रहती है तो यह दल-बदल कानून के तहत महत्वपूर्ण राजनीतिक स्थिति पैदा कर सकती है।
प्रसून बनर्जी हावड़ा लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। खेल जगत और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उनकी पहचान एक प्रभावशाली नेता के रूप में रही है। उनके बागी गुट में शामिल होने से इस खेमे को और मजबूती मिलने की चर्चा है।

इससे पहले भी पार्टी के कई सांसदों और नेताओं के बागी गुट के संपर्क में होने की खबरें सामने आई थीं। वहीं राज्यसभा में भी इस्तीफों और असंतोष की घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।


हालांकि, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने बगावत के दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और कई नेताओं को अब भी पार्टी के साथ होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रसून बनर्जी के इस फैसले से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में बागी गुट की रणनीति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

