आईटीआई में छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर, 168 प्रशिक्षकों की होगी तैनाती

आईटीआई में छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर, 168 प्रशिक्षकों की होगी तैनाती

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्टर

उत्तराखंड के कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की बैठक में प्रदेशभर में संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में छात्र संख्या बढ़ाने, प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार और कौशल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मंत्री सौरभ बहुगुणा ने आगामी भर्ती सत्र को ध्यान में रखते हुए आईटीआई में अधिक से अधिक विद्यार्थियों के नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कौशल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी गांव-गांव और स्कूल-कॉलेज स्तर तक पहुंचाई जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र इन योजनाओं का लाभ उठाकर तकनीकी दक्षता हासिल कर सकें और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

मंत्री ने बताया कि देहरादून के निरंजनपुर, श्रीनगर और अल्मोड़ा स्थित आईटीआई में टीवीएस कंपनी के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं, जिनका शीघ्र उद्घाटन किया जाएगा इन केंद्रों के माध्यम से छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

सौरभ बहुगुणा ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 32 आईटीआई डीएसटी मॉडल के तहत संचालित हो रहे हैं, जहां छात्र छह माह संस्थान में और छह माह संबंधित उद्योगों में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि डीएसटी मॉडल के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए सरकार अब ऐसे आईटीआई की संख्या 32 से बढ़ाकर 45 करने जा रही है इससे अधिक संख्या में छात्रों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण और कौशल विकास का लाभ मिलेगा।

बैठक में मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 168 नए आईटीआई प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है, जिससे प्रदेश में कौशल विकास को नई गति मिल सके।