खटीमा में वन निगम की लॉट से 304 पेड़ों के गायब होने का आरोप, जांच की मांग तेज

खटीमा में वन निगम की लॉट से 304 पेड़ों के गायब होने का आरोप, जांच की मांग तेज

स्थान – खटीमा /ऊधम सिंह नगर
रिपोर्टर – अशोक सरकार

जनपद ऊधम सिंह नगर के खटीमा क्षेत्र में वन निगम की दक्षिणी जौलासाल रेंज की लॉट संख्या 24-का को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ठेकेदार ने सैकड़ों पेड़ों और लट्ठों के गायब होने का आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार लॉट संख्या 24 में पेड़ों की ढुलाई का टेंडर ठेकेदार ठाकुर सिंह को मिला था। कुल 1210 पेड़ों में से वन विभाग द्वारा 906 पेड़ों का कटान किया गया था, जिनकी ढुलाई ठेकेदार ने निर्धारित समय के भीतर पूरी कर दी थी।

बताया जा रहा है कि शेष 304 पेड़ों का कटान होना बाकी था। वर्ष 2026 में जब ठेकेदार दोबारा ढुलाई कार्य के लिए लॉट क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें न तो छपान किए गए पेड़ मिले और न ही कटे हुए पेड़ों के लट्ठे दिखाई दिए, जिससे मामला संदिग्ध हो गया।

ठेकेदार ठाकुर सिंह का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में तत्काल प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक को सूचना दी। इसके बाद जब वन निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो इकाई इंचार्ज ने मौके पर केवल 30 पेड़ दिखाए और कहा कि ठेकेदार को पेड़ों की संख्या से कोई मतलब नहीं रखना चाहिए।

ठाकुर सिंह का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी अनियमितताओं की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी थी, लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने शेष 304 पेड़ों के संबंध में निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।

ठेकेदार ने मांग की है कि जांच के दौरान उन्हें भी मौके पर बुलाया जाए ताकि छपान किए गए पेड़ों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके और अधूरे कार्य को पूरा किया जा सके।

मामले में वन निगम के स्केलर अमन बिष्ट ने दावा किया है कि संबंधित लॉट के लिए नया टेंडर किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक टनकपुर विशन लाल आर्या ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि कोई नया टेंडर नहीं हुआ है।

अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों ने पूरे मामले को और अधिक उलझा दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर 304 पेड़ों का रिकॉर्ड कहां है और सच्चाई क्या है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है तथा लोगों की निगाहें विभागीय जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।